CTET Level -1 (23 June 2024)

Question 1:

निर्देश निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही। सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए ।

गुरु-शिष्य परंपरा में शिष्य के साथ गुरु का नाम पहले आता है। यह अमुक गुरु का शिष्य है- ऐसा कहा जाता है। गुरु अपने एक-एक शब्द से शिष्य में अवतरित होता है। जो शिष्य पूरी तरह से अपने गुरू को समर्पित है, उसके जीवन में एक समय आता है, जब वह गुरू की आराधना और उपासना करते-करते गुरुमय हो जाता है। शिष्य की वृत्ति सद्गुरू में मिल जाती है। उनकी प्रत्येक चेष्टा में, हावभाव में, वाणी में गुरू का ही प्रतिबिंब नजर आता है। इतना ही नहीं, उसकी आकृति भी गुरू जैसी हो जाती है। कई की तो वाणी भी गुरु जैसी ही हो जाती है। वाणी, विचार, वृत्ति, वेशभूषा, सब में जब सद्गुरु अवतरित होते हैं तब यह नहीं पूछना पड़ता कि तुम्हारा गुरु कौन है? तब तो यह शिष्य को देखते ही पता चल जाता है । जब परमात्मा अवतरित होते हैं, तो पहले सुयोग्य माता-पिता की खोज करते हैं, उसी प्रकार सद्गुरू अवतरित होने के लिए होनहार शिष्य ढूँढ़ते हैं। गुरू अपने शिष्य से माँ से भी ज्यादा परंपरा के माध्यम से यह अविनाशी गुरुतत्व हमेशा शिष्य को प्रकाश देता रहता है।

गुरु- -शिष्य परंपरा में ।

  • शिष्य और गुरु दोनों का नाम एक साथ आता है।

  • गुरू का नाम शिष्य के बाद आता है।

  • गुरू के साथ शिष्य का नाम पहले आता है।

  • शिष्य के साथ गुरू का नाम पहले आता है।

Question 2:

निर्देश निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही। सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए । 
गुरु-शिष्य परंपरा में शिष्य के साथ गुरु का नाम पहले आता है। यह अमुक गुरु का शिष्य है- ऐसा कहा जाता है। गुरु अपने एक-एक शब्द से शिष्य में अवतरित होता है। जो शिष्य पूरी तरह से अपने गुरू को समर्पित है, उसके जीवन में एक समय आता है, जब वह गुरू की आराधना और उपासना करते-करते गुरुमय हो जाता है। शिष्य की वृत्ति सद्गुरू में मिल जाती है। उनकी प्रत्येक चेष्टा में, हावभाव में, वाणी में गुरू का ही प्रतिबिंब नजर आता है। इतना ही नहीं, उसकी आकृति भी गुरू जैसी हो जाती है। कई की तो वाणी भी गुरु जैसी ही हो जाती है। वाणी, विचार, वृत्ति, वेशभूषा, सब में जब सद्गुरु अवतरित होते हैं तब यह नहीं पूछना पड़ता कि तुम्हारा गुरु कौन है? तब तो यह शिष्य को देखते ही पता चल जाता है । जब परमात्मा अवतरित होते हैं, तो पहले सुयोग्य माता-पिता की खोज करते हैं, उसी प्रकार सद्गुरू अवतरित होने के लिए होनहार शिष्य ढूँढ़ते हैं। गुरू अपने शिष्य से माँ से भी ज्यादा परंपरा के माध्यम से यह अविनाशी गुरुतत्व हमेशा शिष्य को प्रकाश देता रहता है।

"गुरू अपने एक-एक शब्द से शिष्य में अवतरित होता है ।" वाक्य से तात्पर्य है ।

  • गुरू शब्दों द्वारा शिष्य को पढ़ाता है।

  • गुरू की शिक्षा शिष्य में प्रतिबिंबित होती है।

  • गुरू अपने शिष्य का अवतार लेते हैं।

  • गुरू अपने शिष्य से प्रेम करता है।

Question 3:

निर्देश निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही। सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए । 
गुरु-शिष्य परंपरा में शिष्य के साथ गुरु का नाम पहले आता है। यह अमुक गुरु का शिष्य है- ऐसा कहा जाता है। गुरु अपने एक-एक शब्द से शिष्य में अवतरित होता है। जो शिष्य पूरी तरह से अपने गुरू को समर्पित है, उसके जीवन में एक समय आता है, जब वह गुरू की आराधना और उपासना करते-करते गुरुमय हो जाता है। शिष्य की वृत्ति सद्गुरू में मिल जाती है। उनकी प्रत्येक चेष्टा में, हावभाव में, वाणी में गुरू का ही प्रतिबिंब नजर आता है। इतना ही नहीं, उसकी आकृति भी गुरू जैसी हो जाती है। कई की तो वाणी भी गुरु जैसी ही हो जाती है। वाणी, विचार, वृत्ति, वेशभूषा, सब में जब सद्गुरु अवतरित होते हैं तब यह नहीं पूछना पड़ता कि तुम्हारा गुरु कौन है? तब तो यह शिष्य को देखते ही पता चल जाता है । जब परमात्मा अवतरित होते हैं, तो पहले सुयोग्य माता-पिता की खोज करते हैं, उसी प्रकार सद्गुरू अवतरित होने के लिए होनहार शिष्य ढूँढ़ते हैं। गुरू अपने शिष्य से माँ से भी ज्यादा परंपरा के माध्यम से यह अविनाशी गुरुतत्व हमेशा शिष्य को प्रकाश देता रहता है।

" शिष्य गुरु की आराधना और उपासना करते-करते गुरुमय हो जाता है ।" का आशय है।

 

  • शिष्य गुरू की शिक्षाओं को आत्मसात करके उसी राह पर चलता है ।

  • शिष्य के व्यक्तित्व पर गुरु का थोड़ा-थोड़ा प्रभाव दिखने लगता है।

  • शिष्य के व्यक्तित्व में गुरू का प्रतिबिंब दिखाई देता है ।

  • शिष्य स्वयं गुरु बन जाता है ।

Question 4:

निर्देश निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही। सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए । 
गुरु-शिष्य परंपरा में शिष्य के साथ गुरु का नाम पहले आता है। यह अमुक गुरु का शिष्य है- ऐसा कहा जाता है। गुरु अपने एक-एक शब्द से शिष्य में अवतरित होता है। जो शिष्य पूरी तरह से अपने गुरू को समर्पित है, उसके जीवन में एक समय आता है, जब वह गुरू की आराधना और उपासना करते-करते गुरुमय हो जाता है। शिष्य की वृत्ति सद्गुरू में मिल जाती है। उनकी प्रत्येक चेष्टा में, हावभाव में, वाणी में गुरू का ही प्रतिबिंब नजर आता है। इतना ही नहीं, उसकी आकृति भी गुरू जैसी हो जाती है। कई की तो वाणी भी गुरु जैसी ही हो जाती है। वाणी, विचार, वृत्ति, वेशभूषा, सब में जब सद्गुरु अवतरित होते हैं तब यह नहीं पूछना पड़ता कि तुम्हारा गुरु कौन है? तब तो यह शिष्य को देखते ही पता चल जाता है । जब परमात्मा अवतरित होते हैं, तो पहले सुयोग्य माता-पिता की खोज करते हैं, उसी प्रकार सद्गुरू अवतरित होने के लिए होनहार शिष्य ढूँढ़ते हैं। गुरू अपने शिष्य से माँ से भी ज्यादा परंपरा के माध्यम से यह अविनाशी गुरुतत्व हमेशा शिष्य को प्रकाश देता रहता है।

किस प्रकार के शिष्य पर गुरू का प्रभाव अधिक दिखाई देता है ?

  • विद्वान

  • बुद्धिमान

  • परिश्रमी

  • पूर्णतः समर्पित

Question 5:

निर्देश निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही। सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए । 
गुरु-शिष्य परंपरा में शिष्य के साथ गुरु का नाम पहले आता है। यह अमुक गुरु का शिष्य है- ऐसा कहा जाता है। गुरु अपने एक-एक शब्द से शिष्य में अवतरित होता है। जो शिष्य पूरी तरह से अपने गुरू को समर्पित है, उसके जीवन में एक समय आता है, जब वह गुरू की आराधना और उपासना करते-करते गुरुमय हो जाता है। शिष्य की वृत्ति सद्गुरू में मिल जाती है। उनकी प्रत्येक चेष्टा में, हावभाव में, वाणी में गुरू का ही प्रतिबिंब नजर आता है। इतना ही नहीं, उसकी आकृति भी गुरू जैसी हो जाती है। कई की तो वाणी भी गुरु जैसी ही हो जाती है। वाणी, विचार, वृत्ति, वेशभूषा, सब में जब सद्गुरु अवतरित होते हैं तब यह नहीं पूछना पड़ता कि तुम्हारा गुरु कौन है? तब तो यह शिष्य को देखते ही पता चल जाता है । जब परमात्मा अवतरित होते हैं, तो पहले सुयोग्य माता-पिता की खोज करते हैं, उसी प्रकार सद्गुरू अवतरित होने के लिए होनहार शिष्य ढूँढ़ते हैं। गुरू अपने शिष्य से माँ से भी ज्यादा परंपरा के माध्यम से यह अविनाशी गुरुतत्व हमेशा शिष्य को प्रकाश देता रहता है।

ईश्वर अवतरित होने से पहले किसकी खोज करते हैं?

  • सुयोग्य शिष्य

  • सुयोग्य भाई

  • सुयोग्य माता-पिता

  • सुयोग्य मित्र

Question 6:

निर्देश निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही। सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए । 
गुरु-शिष्य परंपरा में शिष्य के साथ गुरु का नाम पहले आता है। यह अमुक गुरु का शिष्य है- ऐसा कहा जाता है। गुरु अपने एक-एक शब्द से शिष्य में अवतरित होता है। जो शिष्य पूरी तरह से अपने गुरू को समर्पित है, उसके जीवन में एक समय आता है, जब वह गुरू की आराधना और उपासना करते-करते गुरुमय हो जाता है। शिष्य की वृत्ति सद्गुरू में मिल जाती है। उनकी प्रत्येक चेष्टा में, हावभाव में, वाणी में गुरू का ही प्रतिबिंब नजर आता है। इतना ही नहीं, उसकी आकृति भी गुरू जैसी हो जाती है। कई की तो वाणी भी गुरु जैसी ही हो जाती है। वाणी, विचार, वृत्ति, वेशभूषा, सब में जब सद्गुरु अवतरित होते हैं तब यह नहीं पूछना पड़ता कि तुम्हारा गुरु कौन है? तब तो यह शिष्य को देखते ही पता चल जाता है । जब परमात्मा अवतरित होते हैं, तो पहले सुयोग्य माता-पिता की खोज करते हैं, उसी प्रकार सद्गुरू अवतरित होने के लिए होनहार शिष्य ढूँढ़ते हैं। गुरू अपने शिष्य से माँ से भी ज्यादा परंपरा के माध्यम से यह अविनाशी गुरुतत्व हमेशा शिष्य को प्रकाश देता रहता है।

गद्यांश के अनुसार गुरू में अपने शिष्य के प्रति.......... का भाव होता है।

  • स्त्रीत्व

  • गुरुत्व

  • ममत्व

  • पुरुषत्व

Question 7:

निर्देश निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही। सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए । 
गुरु-शिष्य परंपरा में शिष्य के साथ गुरु का नाम पहले आता है। यह अमुक गुरु का शिष्य है- ऐसा कहा जाता है। गुरु अपने एक-एक शब्द से शिष्य में अवतरित होता है। जो शिष्य पूरी तरह से अपने गुरू को समर्पित है, उसके जीवन में एक समय आता है, जब वह गुरू की आराधना और उपासना करते-करते गुरुमय हो जाता है। शिष्य की वृत्ति सद्गुरू में मिल जाती है। उनकी प्रत्येक चेष्टा में, हावभाव में, वाणी में गुरू का ही प्रतिबिंब नजर आता है। इतना ही नहीं, उसकी आकृति भी गुरू जैसी हो जाती है। कई की तो वाणी भी गुरु जैसी ही हो जाती है। वाणी, विचार, वृत्ति, वेशभूषा, सब में जब सद्गुरु अवतरित होते हैं तब यह नहीं पूछना पड़ता कि तुम्हारा गुरु कौन है? तब तो यह शिष्य को देखते ही पता चल जाता है । जब परमात्मा अवतरित होते हैं, तो पहले सुयोग्य माता-पिता की खोज करते हैं, उसी प्रकार सद्गुरू अवतरित होने के लिए होनहार शिष्य ढूँढ़ते हैं। गुरू अपने शिष्य से माँ से भी ज्यादा परंपरा के माध्यम से यह अविनाशी गुरुतत्व हमेशा शिष्य को प्रकाश देता रहता है।

'सदगुरु' का संधि-विच्छेद है।

  • सत् + गुरु

  • स + गुरु

  • सु + गुरु

  • सत + गुरु

Question 8:

निर्देश निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही। सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए । 
गुरु-शिष्य परंपरा में शिष्य के साथ गुरु का नाम पहले आता है। यह अमुक गुरु का शिष्य है- ऐसा कहा जाता है। गुरु अपने एक-एक शब्द से शिष्य में अवतरित होता है। जो शिष्य पूरी तरह से अपने गुरू को समर्पित है, उसके जीवन में एक समय आता है, जब वह गुरू की आराधना और उपासना करते-करते गुरुमय हो जाता है। शिष्य की वृत्ति सद्गुरू में मिल जाती है। उनकी प्रत्येक चेष्टा में, हावभाव में, वाणी में गुरू का ही प्रतिबिंब नजर आता है। इतना ही नहीं, उसकी आकृति भी गुरू जैसी हो जाती है। कई की तो वाणी भी गुरु जैसी ही हो जाती है। वाणी, विचार, वृत्ति, वेशभूषा, सब में जब सद्गुरु अवतरित होते हैं तब यह नहीं पूछना पड़ता कि तुम्हारा गुरु कौन है? तब तो यह शिष्य को देखते ही पता चल जाता है । जब परमात्मा अवतरित होते हैं, तो पहले सुयोग्य माता-पिता की खोज करते हैं, उसी प्रकार सद्गुरू अवतरित होने के लिए होनहार शिष्य ढूँढ़ते हैं। गुरू अपने शिष्य से माँ से भी ज्यादा परंपरा के माध्यम से यह अविनाशी गुरुतत्व हमेशा शिष्य को प्रकाश देता रहता है।

'समर्पित' में प्रत्यय है-

 

  • र्पित

  •   पित

  •  इत

Question 9:

निर्देश निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही। सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए । 
गुरु-शिष्य परंपरा में शिष्य के साथ गुरु का नाम पहले आता है। यह अमुक गुरु का शिष्य है- ऐसा कहा जाता है। गुरु अपने एक-एक शब्द से शिष्य में अवतरित होता है। जो शिष्य पूरी तरह से अपने गुरू को समर्पित है, उसके जीवन में एक समय आता है, जब वह गुरू की आराधना और उपासना करते-करते गुरुमय हो जाता है। शिष्य की वृत्ति सद्गुरू में मिल जाती है। उनकी प्रत्येक चेष्टा में, हावभाव में, वाणी में गुरू का ही प्रतिबिंब नजर आता है। इतना ही नहीं, उसकी आकृति भी गुरू जैसी हो जाती है। कई की तो वाणी भी गुरु जैसी ही हो जाती है। वाणी, विचार, वृत्ति, वेशभूषा, सब में जब सद्गुरु अवतरित होते हैं तब यह नहीं पूछना पड़ता कि तुम्हारा गुरु कौन है? तब तो यह शिष्य को देखते ही पता चल जाता है । जब परमात्मा अवतरित होते हैं, तो पहले सुयोग्य माता-पिता की खोज करते हैं, उसी प्रकार सद्गुरू अवतरित होने के लिए होनहार शिष्य ढूँढ़ते हैं। गुरू अपने शिष्य से माँ से भी ज्यादा परंपरा के माध्यम से यह अविनाशी गुरुतत्व हमेशा शिष्य को प्रकाश देता रहता है।

'समय' का पर्यायवाची शब्द नहीं है।

  • बेला

  • घड़ियाँ

  • काल

  • घड़ी

Question 10:

निर्देश: निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही / सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए ।

धरती की परियों के सपनीले प्यार में

नई चेतना, नई उमंग बोलने लगी।

कुछ ऐसे भोर की बयार गुनगुना उठी,

अलसाए कुहरे की बाँह सिमटने लगी न

नरम-नरम किरणों की नई-नई धूप में

राहों के पेड़ों की छाँह लिपटने लगी।

भोर अपने संग क्या लाई है ?

  • नई उमंग और नई उमंग

  • नई उमंग और प्रेम

  • नई चेतना और स्वप्न

  • नई चेतना और नई उमंग

Scroll to Top
SSC Exams: 3 Exam Dates Out, When Will the CGL Date Be Announced? RRB Group D: Which Is the Most Preferred Post? BPSC TRE 4: New Posts Added to Teacher Recruitment 2026 Bihar Agriculture Department ATM Vacancy: How Many Posts Are Available? Railway Maths Preparation: Follow Rahul Sir’s Strategy