हाल ही में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ( Supreme Court ) ने आरक्षण की व्यवस्था और चयन प्रक्रिया को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया है | न्यायमूर्ति सतीश चन्द्र शर्मा की पीठ ने यह साफ़ कर दिया है कि अनारक्षित श्रेणी केवल सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित कोई कोटा नहीं है | यह फैसला उन हजारो मेधावी छात्रों के लिए एक बड़ी जीत हैं जो आरक्षित श्रेणियों (SC, ST, OBC) से आते हैं लेकिन अपनी प्रतिभा के दम पर सामान्य कट-ऑफ को पार करते हैं |
और कहा है कि यह एक खुला पुल है जो योग्यता के आधार पर सभी के लिए उपलब्ध है | यह योग्यता आधारित बदलाव अनुछेद 14 (कानून के समक्ष समानता ) और अनुछेद 16 (सार्वजनिक रोजगार में अवसर की समानता) की आवश्यकता है|

क्या था विवाद :
विवाद 2013 में Airports Authority of India (AAI ) की और से जूनियर असिस्टेंट (फायर सर्विस) के 245 पदों के लिए चलाये गए भर्ती अभियान से उत्पन्न हुआ था | चयन प्रक्रिया के बाद, एएआई ने सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों और ओबीसी, एससी, एसटी प्रस्ठभूमि के मेधावी उम्मीदवारों को शामिल करते हुए 122 अनारक्षित सीटें भरीं | अनारक्षित श्रेणी के उम्मीदवार शाम कृष्णा बी, जिन्हें प्रतीक्षा में क्रमांक 10 पर रखा गया था, ने इस प्रक्रिया को चुनौती दी |
Highlights Of The Decision:
आदालत ने अपने फैसले में संविधान के अनुछेद 14 और 16 का हवाला देते हुए इन बातो को स्पष्ट किया :
- Merit Is Paramount : यदि कोई आरक्षित वर्ग का अभ्यर्थी बिना किसी रियायत के सामान्य श्रेणी के कट-ऑफ से अधिक अंक लता है, तो उसे अनारक्षित सीट पर जगह मिलेगी |
- Open Pool : अनारक्षित सीटे सबके लिए खुली हैं | यह एक ओपन पूल है जिसमे योग्यता के आधार पर किसी भी वर्ग का व्यक्ति प्रवेश कर सकता है |
- Benefits Of Quota Seats: जब एक आरक्षित छात्र अनारक्षित सीट पर चुना जाता है, तो उसके वर्ग (SC,ST,OBC) की आरक्षित सीट खाली रह जाती है | उस सीट पर उसी वर्ग के अगले योग्य उम्मीदवार को मौका मिलता है | इसे आरक्षण का वास्तविक उद्देश्य पूरा होता है |
- Keral High Court’s Decision Quashed : सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाई कोर्ट के फैसले को पलट दिया जिसमे एअरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ़ india (AAI) को मेधावी आरक्षित उम्मीदवारों को सामान्य सूची से हटाने को कहा गया था |
Difference Between Selection Process And Roaster :
अधिकतर लोगो में भ्रम होता है कि भर्ती का रोस्टर ही चयन का आधार है | कोर्ट ने इसे भी स्पष्ट किया :
| Item | Details |
| आरक्षण रोस्टर : | इसका उपयोग केवल विज्ञापित पदों की संख्या तय करने के लिए किया जायेगा कि किस वर्ग की कितनी सीट हैं| |
| चयन प्रक्रिया : | चयन पूरी तरह से प्राप्त अंको और योग्यता के आधार पर होता है | चयन का माध्यम रोस्टर नहीं है| |
| अनारक्षित सीट : | यह वह सीट है जिसे कोई भी अपनी योग्यता के आधार पर प्राप्त कर सकता है। |
| आरक्षित सीट : | यह सीट विशेष वर्गों के सुरक्षित है ताकि समाज में पिछड़े वगों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके| |
Other Important Decisions:
न्यूनतम योग्यता तय करना राज्य का अधिकार :
बिहार फार्मासिस्ट भर्ती मामले में कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार को यह तय करने का पूरा हक़ है कि किसी पद के लिए न्यूनतम योग्यता क्या होगी | कोर्ट ने डिप्लोमा इन फार्मेसी को अनिवार्य मानने के बिहार सरकार के नियम वैध ठहराया |
बार काउंसलिंग में महिलाओ को 30% प्रतिनिधित्व :
पंजाब और हरयाणा बार काउंसिल के चुनाव में अब महिला अधिवक्ता को 30% आरक्षण मिलेगा | कोर्ट का कहना है कि क़ानूनी पेशे में महिलाओं की बढती संख्या को देखते हुए उनका उचित प्रतिनिधित्व जरुरी है |
विधायकों की योग्यता पर सख्त रुख :
तेलंगाना में BRS को छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने वाले विधायकों की योग्यता के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने विधान सभा अध्यक्ष से दो हफ्ते की रिपोर्ट मांगी है कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी |
Conclusion :
सुप्रीम कोर्ट का यह सन्देश स्पष्ट है : योग्यता को पहचान मिलनी चाहिए |अनारक्षित सीटों को सामान्य वर्गों का कोटा समझना एक क़ानूनी भूल है | यह फैसला भविष्य की सभी भर्तियों में सुधार लायेगा और यह सुनिश्चित करेगा की आरक्षित वर्गों के मेधावी छात्र अपनी मेहनत के दम पर आगे बढ़ें , बिना अपने कोटे की सेटों को नुकसान पहुंचाए |
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