Neet-Ug

NEET-UG to be Conducted in Multiple Phases 

सरकार 2027 से ‘नीट-यूजी’ (NEET-UG) की परीक्षा कंप्यूटर पर (CBT मोड में) कराने की तैयारी कर रही है। नई दिल्ली से पंकज कुमार पाण्डेय की रिपोर्ट के मुताबिक, इतनी बड़ी परीक्षा को सुरक्षित, साफ-सुथरे और बेहतर तरीके से कराना एक बहुत बड़ी चुनौती है।हर साल लगभग 25 लाख बच्चे यह परीक्षा देते हैं। इसलिए इसे एक ही दिन में कराने के बजाय अलग-अलग दिनों और शिफ्टों (पारी) में कराने पर विचार किया जा रहा है। सरकार एक खास कमेटी (टास्क फोर्स) के प्लान के हिसाब से ही आगे का फैसला लेगी और धीरे-धीरे इसमें सुधार करेगी।

NEET-UG New Update : Overview Table

Key Aspect Details
Exam Name NEET-UG (National Eligibility cum Entrance Test)
Proposed Year for CBT 2027
Total Candidates Approx. 25 Lakhs
Current Single-Shift Capacity Approx. 1.5 to 2 Lakhs Candidates
Key Objectives
  • Multi-phase exam
  • Robust Cybersecurity
  • Normalization
  • Strict Security Standards for Test Centers

Infrastructure Challenges and Multi-Phase Roadmap

सूत्रों के अनुसार, सिर्फ पेपर-पेन वाली परीक्षा बंद करके कंप्यूटर पर टेस्ट शुरू कर देना ही काफी नहीं होगा। फिलहाल हमारे देश में एक दिन की एक पाली (shift) में सिर्फ 1.5 से 2 लाख बच्चे ही कंप्यूटर पर परीक्षा दे सकते हैं। ऐसे में 25 लाख बच्चों के लिए रातों-रात इतने सारे कंप्यूटर और सेंटर तैयार करना बहुत बड़ी चुनौती है।

इसी वजह से एक खास योजना बनाई जा रही है, जिसमें इन मुख्य बातों पर काम होगा:

  • कंप्यूटर और इंटरनेट की सुविधाओं को बढ़ाना
  • कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और डेटा को हैकिंग से बचाना
  • परीक्षा केंद्रों (exam centers) को बहुत ध्यान से चुनना
  • जरूरी कामों में बाहरी कंपनियों (outsourcing) की दखल कम करना
  • परीक्षा कराने वाले सभी सेंटरों और कर्मचारियों की पूरी बैकग्राउंड जांच करना
  • परीक्षा कराने वाली कंपनियों के साथ सख्त नियम और शर्तें तय करना

Redesigning Every Stage for Cyber Security and Integrity

सबसे बड़ी चुनौती एक ऐसा सिस्टम तैयार करने की है, जिससे पेपर लीक का खतरा पूरी तरह खत्म हो जाए। इसलिए परीक्षा के हर कदम को नए सिरे से और बेहतर तरीके से डिजाइन किया जा रहा है, ताकि:

  • सिस्टम साइबर हमलों से पूरी तरह सुरक्षित रहे
  • कोई भी सॉफ्टवेयर को हैक न कर सके
  • सर्वर ठप होने या किसी भी तरह की तकनीकी खराबी से बचा जा सके

इसके साथ ही, प्रश्नपत्र तैयार करने, सर्वर संभालने और बाकी जरूरी कामों के लिए सिर्फ उन्हीं लोगों को रखा जाएगा जिनकी पूरी जांच-पड़ताल हो चुकी हो और जो अपनी जिम्मेदारी समझें। पेपर लीक की घटनाओं के बाद की गई शुरुआती घोषणाओं को practically रूप से लागू करने के तरीकों पर फिर से विचार  किया जा रहा है।

Implementation of Scientific Normalization System

जब इतनी बड़ी परीक्षा को एक ही दिन में कराने के बजाय अलग-अलग शिफ्ट में कराया जाएगा, तो यह ध्यान रखना बहुत जरूरी होगा कि हर शिफ्ट का पेपर एक जैसा ही कठिन या आसान हो।इसीलिए एक Scientific Normalization  तरीका तैयार करने पर विचार किया जा रहा है। इसका फायदा यह होगा कि किसी कठिन शिफ्ट या आसान शिफ्ट की वजह से किसी भी बच्चे को फायदा या नुकसान न हो और सब के साथ बराबर का न्याय हो सके।

Strict Security Standards for Examination Centers

परीक्षा केंद्रों को सुरक्षित बनाने के लिए नए और कड़े नियम तय किए जा रहे हैं। नए नियमों के तहत सेंटर चुनते समय इन बातों का ध्यान रखना जरूरी होगा:

  • High Technical Standard : परीक्षा केंद्र के पास अच्छे कंप्यूटर, तेज इंटरनेट और आधुनिक सुविधाएं होना जरूरी है।
  • Detailed Background Check : जिस संस्थान को सेंटर बनाया जा रहा है, उसके पुराने रिकॉर्ड और साख की पूरी जांच-पड़ताल की जाएगी।
  • Mandatory Technical & Security Audit : सेंटर की तकनीकी और सुरक्षा व्यवस्था की समय-समय पर जांच (ऑडिट) करना जरूरी होगा।
  • Strict Legal Contracts : गड़बड़ी रोकने के लिए केंद्रों और परीक्षा कराने वाली एजेंसियों के साथ सख्त कानूनी समझौते किए जाएंगे, ताकि कोई भी गलती होने पर उनकी सीधी जिम्मेदारी तय की जा सके।

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