हाल ही में, जनजातीय कार्य मंत्रालय (Ministry of Tribal Affairs) ने आज नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आदि कर्मयोगी अभियान पर राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान "आदि संस्कृति" के बीटा संस्करण (Beta Version of “Adi Sanskriti”) की शुरूआत की है| इसकी शुरुआत जनजातीय कार्य राज्य मंत्री, दुर्गादास उइके ने किया| यह आदिवासी कलारूपों, विरासत के संरक्षण, आजीविका को सक्षम बनाने और भारत के जनजातीय समुदायों को दुनिया से जोड़ने के लिए एक अग्रणी डिजिटल शिक्षण मंच है| इसकी कल्पना दुनिया के पहले डिजिटल जनजातीय विश्वविद्यालय (Digital Tribal University) के रूप में की गई है| आदि संस्कृति का निर्माण राज्य जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (State Tribal Research Institutes (TRIs) के साथ साझेदारी में किया जा रहा है| इसके पहले चरण में, आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मेघालय, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश के टीआरआई ने जनजातीय कलाकृतियों के दस्तावेजीकरण, विषयवस्तु संग्रह और डिजिटल मानचित्रण में योगदान दिया है|