DSSSB TGT PART-1 (23 June 2024)

Question 1:

श्री गुरु चरन सरोज रज, निज मन मुकुरु सुधार ।

बरनौ रघुवर विमल जस, जो दायक फल चारि॥"

में छन्द है-

  • सोरठा

  •  बरवै

  • दोहा

  • रोला

Question 2:

रौद्र रस का स्थायीभाव क्या होता है ?

  • क्रोध

  • भय

  • रति

  • शोक

Question 3:

नीचे दिए गए उदाहरणों के साथ संधि का नाम किस विकल्प में अशुद्ध है?

  • वनोत्सव - दीर्घ संधि

  • महार्णव - दीर्घ संधि 

  • दिगंबर - व्यंजन संधि

  • सदैव - वृद्धि संधि

Question 4:

समास के कितने भेद हैं?

  • पाँच

  •  छह

  • तीन

  • चार

Question 5:

शब्द- प्रकार के आधार पर 'मनुष्यता' शब्दों का कौन-सा भेद है?

  • प्रेरणार्थक क्रिया

  • गुणवाचक विशेषण

  • जातिवाचक संज्ञा

  • भाववाचक संज्ञा

Question 6:

नीचे दिए गद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित प्रश्न का सर्वाधिक उचित विकल्प का चयन कीजिए-

अपने देश में नवीन राष्ट्र के निर्माण का कार्य भी विवेकानन्द आरंभ कर गए। व्यक्तियों के समष्टि को राष्ट्र कहते हैं। सच्चे मनुष्यों का निर्माण हुए बिना स्वाधीन और बलवान राष्ट्र का जन्म नहीं हो सकता । इसलिए उन्होंने कहा था, "मानव निर्माण ही मेरा लक्ष्य है । ' तत्पश्चात् सच्चे मनुष्य के निर्माण के लिए उन्होंने  किसी वर्ग विशेष की ओर अपनी दृष्टि केन्द्रित न करके समग्र समाज की ओर ध्यान दिया।

स्वामी विवेकानंद का जीवन लक्ष्य था -

  • व्यक्तित्व-निर्माण

  • समुदाय निर्माण

  • समाज-निर्माण

  • मानव-निर्माण

Question 7:

नीचे दिए गद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित प्रश्न का सर्वाधिक उचित विकल्प का चयन कीजिए-

अपने देश में नवीन राष्ट्र के निर्माण का कार्य भी विवेकानन्द आरंभ कर गए। व्यक्तियों के समष्टि को राष्ट्र कहते हैं। सच्चे मनुष्यों का निर्माण हुए बिना स्वाधीन और बलवान राष्ट्र का जन्म नहीं हो सकता । इसलिए उन्होंने कहा था, "मानव निर्माण ही मेरा लक्ष्य है । ' तत्पश्चात् सच्चे मनुष्य के निर्माण के लिए उन्होंने  किसी वर्ग विशेष की ओर अपनी दृष्टि केन्द्रित न करके समग्र समाज की ओर ध्यान दिया।

व्यक्तियों के समूह को ___________ कहते हैं।

  • समुदाय

  • परिवार

  • समाज

  • राष्ट्र

Question 8:

नीचे दिए गद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित प्रश्न का सर्वाधिक उचित विकल्प का चयन कीजिए-

अपने देश में नवीन राष्ट्र के निर्माण का कार्य भी विवेकानन्द आरंभ कर गए। व्यक्तियों के समष्टि को राष्ट्र कहते हैं। सच्चे मनुष्यों का निर्माण हुए बिना स्वाधीन और बलवान राष्ट्र का जन्म नहीं हो सकता । इसलिए उन्होंने कहा था, "मानव निर्माण ही मेरा लक्ष्य है । ' तत्पश्चात् सच्चे मनुष्य के निर्माण के लिए उन्होंने  किसी वर्ग विशेष की ओर अपनी दृष्टि केन्द्रित न करके समग्र समाज की ओर ध्यान दिया।

विवेकानंद कैसा राष्ट्र चाहते थे?

  • सशक्त एवं स्वतंत्र

  • सामाजिक एवं सशक्त

  • विस्तृत एवं स्वतंत्र

  • स्वतंत्र एवं सामाजिक

Question 9:

नीचे दिए गद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित प्रश्न का सर्वाधिक उचित विकल्प का चयन कीजिए-

अपने देश में नवीन राष्ट्र के निर्माण का कार्य भी विवेकानन्द आरंभ कर गए। व्यक्तियों के समष्टि को राष्ट्र कहते हैं। सच्चे मनुष्यों का निर्माण हुए बिना स्वाधीन और बलवान राष्ट्र का जन्म नहीं हो सकता । इसलिए उन्होंने कहा था, "मानव निर्माण ही मेरा लक्ष्य है । ' तत्पश्चात् सच्चे मनुष्य के निर्माण के लिए उन्होंने  किसी वर्ग विशेष की ओर अपनी दृष्टि केन्द्रित न करके समग्र समाज की ओर ध्यान दिया।

विवेकानंद जी ने मानव-निर्माण के लिए -

  • जाति विशेष को चुना

  • वर्ग विशेष को चुना

  • समस्त समाज को चुना

  • धर्म विशेष को चुना

Question 10:

नीचे दिए गद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित प्रश्न का सर्वाधिक उचित विकल्प का चयन कीजिए-

अपने देश में नवीन राष्ट्र के निर्माण का कार्य भी विवेकानन्द आरंभ कर गए। व्यक्तियों के समष्टि को राष्ट्र कहते हैं। सच्चे मनुष्यों का निर्माण हुए बिना स्वाधीन और बलवान राष्ट्र का जन्म नहीं हो सकता । इसलिए उन्होंने कहा था, "मानव निर्माण ही मेरा लक्ष्य है । ' तत्पश्चात् सच्चे मनुष्य के निर्माण के लिए उन्होंने  किसी वर्ग विशेष की ओर अपनी दृष्टि केन्द्रित न करके समग्र समाज की ओर ध्यान दिया।

'समष्टि' का विलोम है

  • व्यष्टि

  • एकल

  • एकाकी

  • विस्तृत

Scroll to Top
Top Zinc Producing Mines in Rajasthan Explained 53 New Battalions to Be Formed in CAPF: Big Update! J.B. Kripalani: The Unsung Hero of India’s Freedom Struggle Karl Mannheim and Sociology of Knowledge in Simple Words UP TET Exam Date Out – Check Full Schedule