DSSSB MTS (30 June 2024)

Question 1:

कोयले की दलाली में मुँह काला’ - इस लोकोक्ति का अर्थ निम्नलिखित में से कौन सा विकल्प दर्शाता है? 

  • अपराधी स्वयं ही डरा डरा रहता है 

  • तुच्छ व्यक्ति अधिक प्रदर्शन करता है 

  • सभी वस्तुएँ समान नहीं होती 

  • बुरा काम बदनामी का कारण बन जाता है। 

Question 2:

पाखण्डी के लिए उपयुक्त मुहावरा क्या होगा ? 

  • बगुला भगत 

  • बछिया के ताऊ 

  • झक मारना 

  • बट्टा लगाना 

Question 3:

'रश्मिरथी' के रचयिता कौन हैं? 

  • रामधारी सिंह दिनकर 

  • शिवसिंह 

  • श्यामसुन्दर दास 

  • पंडित जगन्नाथ 

Question 4:

प्रथम राजभाषा आयोग के अध्यक्ष कौन थे -

  • सुनीत चटर्जी 

  • पी सुबरन

  • जी बी पंत

  • बी जी खेर

Question 5:

इकतीस में समास कौन-सा है? 

  • कर्मधारय 

  • तत्पुरुष 

  • इन्द्र 

  • द्विगु

Question 6:

निम्नलिखित अनुच्छेद को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दिए गए विकल्पों से दें:

सच्ची मित्रता जितनी बहुमूल्य होती है, उसे बनाए रखना भी उतना ही कठिन है। इस मित्रता को स्थिर और दृढ़ रखने के लिए सबसे महत्वपूर्ण आवश्यक तत्त्व हैं सहिष्णुता और उदारता । प्रत्येक व्यक्ति में कुछ न कुछ कमी रहती ही है। पूर्ण निर्दोष और सर्वगुण सम्पन्न व्यक्ति कोई भी नहीं होता । अतः मित्र के अवगुणों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। दोष- दर्शन और एक दूसरे पर छींटाकशी से मित्रता में दरार पैदा होने का भय बना रहता है । आज भौतिकवादी युग है। इस युग में सच्चे मित्र का मिलना वैसे भी कठिन है। अधिकतर मित्र अपना उल्लू सीधा करने के लिए मित्रता का स्वांग रचते हैं और अपना काम बन जाने के बाद अँगूठा दिखाकर चलते बनते है। ऐसे मित्र सामने प्रिय बोलते हैं, लेकिन पीछे विषवमन करते हैं। अतः शास्त्रों का मत है कि ऐसे मित्र मुख पर अमृत वाले विष से भरे घट के समान त्याज्य हैं। रामचरितमानस में कहा गया है- 'जे न मित्र दुख होंहि दुखारी । तिन्हहिं विलोकत पातक भारी ।।

कैसे मित्र विष से भरे घट के समान त्याज्य होते हैं? 

  • जो मित्र सिर्फ चुप रहते हैं। 

  • जो मित्र सिर्फ सच बोलते हैं। 

  • जो सामने प्रिय बोलते हैं, लेकिन पीछे विषवमन करते है । 

  • जो मित्र सिर्फ अप्रिय वचन बोलते है

Question 7:

निम्नलिखित अनुच्छेद को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दिए गए विकल्पों से दें:

सच्ची मित्रता जितनी बहुमूल्य होती है, उसे बनाए रखना भी उतना ही कठिन है। इस मित्रता को स्थिर और दृढ़ रखने के लिए सबसे महत्वपूर्ण आवश्यक तत्त्व हैं सहिष्णुता और उदारता । प्रत्येक व्यक्ति में कुछ न कुछ कमी रहती ही है। पूर्ण निर्दोष और सर्वगुण सम्पन्न व्यक्ति कोई भी नहीं होता । अतः मित्र के अवगुणों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। दोष- दर्शन और एक दूसरे पर छींटाकशी से मित्रता में दरार पैदा होने का भय बना रहता है । आज भौतिकवादी युग है। इस युग में सच्चे मित्र का मिलना वैसे भी कठिन है। अधिकतर मित्र अपना उल्लू सीधा करने के लिए मित्रता का स्वांग रचते हैं और अपना काम बन जाने के बाद अँगूठा दिखाकर चलते बनते है। ऐसे मित्र सामने प्रिय बोलते हैं, लेकिन पीछे विषवमन करते हैं। अतः शास्त्रों का मत है कि ऐसे मित्र मुख पर अमृत वाले विष से भरे घट के समान त्याज्य हैं। रामचरितमानस में कहा गया है- 'जे न मित्र दुख होंहि दुखारी । तिन्हहिं विलोकत पातक भारी ।।

‘विषवमन' शब्द कौन से समास का उदाहरण है? 

  • बहुव्रीहि समास 

  • अव्ययीभाव समास 

  • तत्पुरुष समास 

  • द्वंद्व समास 

Question 8:

निम्नलिखित अनुच्छेद को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दिए गए विकल्पों से दें:

सच्ची मित्रता जितनी बहुमूल्य होती है, उसे बनाए रखना भी उतना ही कठिन है। इस मित्रता को स्थिर और दृढ़ रखने के लिए सबसे महत्वपूर्ण आवश्यक तत्त्व हैं सहिष्णुता और उदारता । प्रत्येक व्यक्ति में कुछ न कुछ कमी रहती ही है। पूर्ण निर्दोष और सर्वगुण सम्पन्न व्यक्ति कोई भी नहीं होता । अतः मित्र के अवगुणों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। दोप- दर्शन और एक दूसरे पर छींटाकशी से मित्रता में दरार पैदा होने का भय बना रहता है । आज भौतिकवादी युग है। इस युग में सच्चे मित्र का मिलना वैसे भी कठिन है। अधिकतर मित्र अपना उल्लू सीधा करने के लिए मित्रता का स्वांग रचते हैं और अपना काम बन जाने के बाद अँगूठा दिखाकर चलते बनते है। ऐसे मित्र सामने प्रिय बोलते हैं, लेकिन पीछे विषवमन करते हैं। अतः शास्त्रों का मत है कि ऐसे मित्र मुख पर अमृत वाले विष से भरे घट के समान त्याज्य हैं। रामचरितमानस में कहा गया है- 'जे न मित्र दुख होंहि दुखारी । तिन्हहिं विलोकत पातक भारी ।।

'पातक' शब्द का विलोम निम्नलिखित में से कौन सा शब्द है? 

  • उपकार

  • अपराध 

  • पुण्य 

  • पाप 

Question 9:

निम्नलिखित अनुच्छेद को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दिए गए विकल्पों से दें:

सच्ची मित्रता जितनी बहुमूल्य होती है, उसे बनाए रखना भी उतना ही कठिन है। इस मित्रता को स्थिर और दृढ़ रखने के लिए सबसे महत्वपूर्ण आवश्यक तत्त्व हैं सहिष्णुता और उदारता । प्रत्येक व्यक्ति में कुछ न कुछ कमी रहती ही है। पूर्ण निर्दोष और सर्वगुण सम्पन्न व्यक्ति कोई भी नहीं होता । अतः मित्र के अवगुणों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। दोप- दर्शन और एक दूसरे पर छींटाकशी से मित्रता में दरार पैदा होने का भय बना रहता है । आज भौतिकवादी युग है। इस युग में सच्चे मित्र का मिलना वैसे भी कठिन है। अधिकतर मित्र अपना उल्लू सीधा करने के लिए मित्रता का स्वांग रचते हैं और अपना काम बन जाने के बाद अँगूठा दिखाकर चलते बनते है। ऐसे मित्र सामने प्रिय बोलते हैं, लेकिन पीछे विषवमन करते हैं। अतः शास्त्रों का मत है कि ऐसे मित्र मुख पर अमृत वाले विष से भरे घट के समान त्याज्य हैं। रामचरितमानस में कहा गया है- 'जे न मित्र दुख होंहि दुखारी । तिन्हहिं विलोकत पातक भारी ।।

मित्रता को स्थिर और दृढ़ रखने के लिए........ सबसे महत्वपूर्ण आवश्यक तत्व हैं। ( उपयुक्त शब्दों में वाक्य पूरा कीजिए । ) 

  • समय पर सहायता न करना 

  • सहिष्णुता और उदारता 

  • उधार लेना उधार देना 

  • बुराई करना और गुणों को छुपाना 

Question 10:

निम्नलिखित अनुच्छेद को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दिए गए विकल्पों से दें:

सच्ची मित्रता जितनी बहुमूल्य होती है, उसे बनाए रखना भी उतना ही कठिन है। इस मित्रता को स्थिर और दृढ़ रखने के लिए सबसे महत्वपूर्ण आवश्यक तत्त्व हैं सहिष्णुता और उदारता । प्रत्येक व्यक्ति में कुछ न कुछ कमी रहती ही है। पूर्ण निर्दोष और सर्वगुण सम्पन्न व्यक्ति कोई भी नहीं होता । अतः मित्र के अवगुणों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। दोप- दर्शन और एक दूसरे पर छींटाकशी से मित्रता में दरार पैदा होने का भय बना रहता है । आज भौतिकवादी युग है। इस युग में सच्चे मित्र का मिलना वैसे भी कठिन है। अधिकतर मित्र अपना उल्लू सीधा करने के लिए मित्रता का स्वांग रचते हैं और अपना काम बन जाने के बाद अँगूठा दिखाकर चलते बनते है। ऐसे मित्र सामने प्रिय बोलते हैं, लेकिन पीछे विषवमन करते हैं। अतः शास्त्रों का मत है कि ऐसे मित्र मुख पर अमृत वाले विष से भरे घट के समान त्याज्य हैं। रामचरितमानस में कहा गया है- 'जे न मित्र दुख होंहि दुखारी । तिन्हहिं विलोकत पातक भारी ।।

किस कारण से मित्रता में दरार पैदा होने का भय बना रहता है ? 

  • दोष-दर्शन और एक दूसरे पर छींटाकशी से 

  • असहयोग करने से 

  • झूठी प्रशंसा करने से 

  • स्पष्ट और सीधी बात कहने से 

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