अमेरिका के वाशिंगटन डीसी स्थित स्मिथसोनियन नेशनल म्यूज़ियम ऑफ एशियन आर्ट (Smithsonian National Museum of Asian Art in Washington, D.C.) ने तीन प्राचीन कांस्य मूर्तियों (ancient bronze statues) को भारत सरकार को लौटायेगा| हाल ही में हुए अनुसंधान ने पुष्टि की कि इन्हें तमिलनाडु के मंदिरों से अवैध रूप से हटाया गया था| इसमें 1956 से 1959 के बीच मंदिरों में मूर्तियों की उपस्थिति को दर्शाने वाले पुद्दुचेरी में फ्रांसीसी संस्थान के फोटो अभिलेखागार से प्राप्त फोटोग्राफिक साक्ष्यों का उपयोग किया गया था| ये मूर्तियाँ, "शिव नटराज" (चोल अवधि, लगभग 990) (Shiva Nataraja (Chola period, circa 990), "सोमास्कंद" (चोल अवधि, 12वीं सदी) (Somaskanda (Chola period, 12th century), और "संत सुंदरर विद परावई" (विजयनगर अवधि, 16वीं सदी) (Saint Sundarar with Paravai (Vijayanagara period, 16th century), है| ये मूल रूप से तमिलनाडु के मंदिरों की जुलूसों में उपयोग किए जाने वाले पवित्र वस्तुएँ थीं| इनमें से एक चोलकालीन ‘शिव नटराज’ मूर्ति भारत सरकार के साथ हुए समझौते के तहत दीर्घकालिक ऋण (long-term loan) के तौर पर अमेरिका में ही रहेगी| इसके तहत म्यूजियम इस मूर्ति को प्रदर्शित करता रहेगा| साथ ही इसके इतिहास, अवैध हटाए जाने और वापसी की पूरी जानकारी सार्वजनिक रूप से साझा करेगा| इस मूर्ति को प्रदर्शनी ‘द आर्ट ऑफ नॉइंग इन साउथ एशिया, साउथईस्ट एशिया, एंड द हिमालयाज (exhibition "The Art of Knowing in South Asia, Southeast Asia, and the Himalayas")’ का हिस्सा बनाया जाएगा ताकि इसके इतिहास हटाए जाने और वापसी की पूरी कहानी सार्वजनिक रूप से दिखाई जा सके| वर्ष 2023 में फ्रांस के पांडिचेरी स्थित फ्रेंच इंस्टीट्यूट के फोटो आर्काइव्स के साथ काम कर रहे शोधकर्ताओं ने पुष्टि की कि ये तीनों कांस्य मूर्तियां 1956 से 1959 के बीच तमिलनाडु के मंदिरों में खींची गई तस्वीरों में मौजूद थीं|