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Rajasthan Police Staff Shortage : 22% Vacancies Put Law and Order Under Pressure !!

Rajasthan Police में रिक्त पदों की स्थिति वर्तमान में एक गंभीर चर्चा का विषय बनी हुई है। किसी भी राज्य की आंतरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की धुरी वहां का पुलिस बल होता है, लेकिन राजस्थान में यह MenPower की कमी के कारण दबाव में नजर आ रही है। हाल ही के आंकड़ों के अनुसार, विभाग में कुल स्वीकृत पदों में से लगभग 22% पद खाली पड़े हैं, जो संख्या के लिहाज से 28,003 के करीब बैठते हैं। 

सबसे चिंताजनक स्थिति मध्यम स्तर के अधिकारियों, विशेषकर SI और ASI की है, जहां रिक्तियों का ग्राफ 50% के करीब पहुंच गया है। ये वही पद हैं जो जमीनी स्तर पर मुकदमों की Investigation और थानों के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार होते हैं। पदों के खाली होने का सीधा असर न केवल पुलिसकर्मियों की कार्यक्षमता पर पड़ रहा है, बल्कि यह आम जनता को मिलने वाले न्याय में देरी का कारण भी बन रहा है।

बढ़ती जनसंख्या और शहरीकरण के अनुपात में पुलिस बल का न बढ़ना एक बड़ी चुनौती है। जहां एक तरफ प्रदेश में रिटायरमेंट की दर तेज है, वहीं दूसरी तरफ भर्ती प्रक्रियाएं प्रशासनिक और तकनीकी कारणों से धीमी रही हैं। इस Men Power संकट के कारण मौजूदा स्टाफ पर 12 से 16 घंटे की ड्यूटी का बोझ है, जिससे उनकी मानसिक और शारीरिक सेहत प्रभावित हो रही है। राजस्थान पुलिस को फिर से सुदृढ़ करने के लिए ‘मिशन मोड’ में नई भर्तियों और प्रशिक्षण क्षमताओं में विस्तार की तत्काल आवश्यकता महसूस की जा रही है।

Rajasthan Police Staff Shortage : Shortage from IPS to Constable 

आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान पुलिस में कुल 1,25,418 स्वीकृत पद हैं, लेकिन इनमें से 28,003 पद रिक्त हैं। इसका मतलब है कि पुलिस बल अपनी कुल क्षमता के लगभग 78% हिस्से के साथ ही काम कर रहा है।

Post Sanctioned Posts Working Personnel Shortfall (%)
IPS 222 214 3.6%
RPS 1,187 948 20.1%
Inspectors 2,313 1,778 23.1%
Head Constable 20,065 14,763 26.4%
Constable 84,159 70,845 15.8%

सबसे ज्यादा चौंकाने वाली स्थिति मध्यम स्तर के जांच अधिकारियों की है। SI के 5,159 पदों में से 2,472 (47.9%) पद खाली हैं, वहीं ASI के 12,313 पदों में से 6,133 (49.8%) पद खाली पड़े हैं। यानी जांच करने वाले लगभग आधे पद रिक्त हैं।

Rajasthan Police Staff Shortage : Direct Impact on Investigation and Patrolling

जब पुलिस बल में आधे जांच अधिकारी ही गायब होंगे, तो उसका परिणाम फाइलों के अंबार के रूप में ही सामने आएगा।

  • जांच में देरी: एक-एक जांच अधिकारी पर वर्तमान में 50 से 100 केस तक का भार है। इसके कारण जो मामले महीनों में सुलझ जाने चाहिए थे, उन्हें सुलझाने में सालों लग रहे हैं।
  • Patrolling : पुलिस थानों में जवानों की कमी के कारण बीट सिस्टम कमजोर हो गया है। जब पुलिस की मौजूदगी सड़कों पर कम होती है, तो अपराधियों के हौसले बुलंद होते हैं।
  • VIP Duty का बोझ: गिने-चुने जवानों को अक्सर वीआईपी सुरक्षा और ट्रैफिक में लगा दिया जाता है, जिससे थानों में रूटीन पुलिसिंग के लिए बहुत कम स्टाफ बचता है। 

Rajasthan Police Staff Shortage : Increasing Pressure on Soldiers 

यह केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि उन इंसानों की कहानी है जो वर्दी पहनकर हमारी रक्षा करते हैं। स्टाफ की कमी का सबसे बुरा असर निचले स्तर के पुलिसकर्मियों पर पड़ रहा है।

  • Over Duty : हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल की कमी की वजह से जवानों को रोजाना 12 से 16 घंटे तक काम करना पड़ रहा है।
  • छुट्टियों की समस्या: Men Power की कमी के कारण जवानों को जरूरी काम या बीमारी की स्थिति में भी छुट्टियां मिलना मुश्किल हो गया है।
  • मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य: लगातार लंबी ड्यूटी और काम के अत्यधिक बोझ के कारण पुलिसकर्मियों में मानसिक तनाव और शारीरिक बीमारियां बढ़ रही हैं, जिसका सीधा असर उनकी कार्यक्षमता पर पड़ता है।

Growing Retirement Gap : 

पिछले 10 वर्षों में भर्ती और रिटायरमेंट के बीच एक बड़ा अंतर पैदा हो गया है। आंकड़ों के अनुसार, हर साल औसतन 2,000 से 2,500 पुलिसकर्मी रिटायर हो रहे हैं। पिछले 10 सालों में लगभग 22,000-25,000 कर्मी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इसके मुकाबले नई भर्तियां बहुत कम और देरी से हुई हैं।

Year Constable Recruitment SI (Sub-Inspector) Recruitment
2018 13,142 859
2020/21 5,438 859
2022/23 4,588 / 3,578
2025 (Proposed) 4,000 1,015

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