देशभर में आयोजित होने वाली SSC ऑनलाइन परीक्षाओं में एक बड़े हाई-टेक घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। उत्तराखंड, दिल्ली और यूपी समेत कई राज्यों में फैली सैकड़ों परीक्षा लैब अब जांच एजेंसियों के संदेह के घेरे में हैं। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की जांच में खुलासा हुआ है कि नकल माफियाओं ने परीक्षा आयोजित कराने वाली कंपनी के कर्मचारियों की मिलीभगत से 500 से ज्यादा लैब स्थापित की थीं। इनमें से 100 से अधिक लैब में नकल कराने की पुख्ता ‘सेटिंग’ की गई थी। इस गिरोह ने सिर्फ कंप्यूटरों का एक्सेस ही नहीं लिया, बल्कि सीसीटीवी कैमरों की लाइव फीड को भी अपने नियंत्रण में कर लिया था। आरोपी ईश्वरी प्रसाद की गिरफ्तारी के बाद इस सिंडिकेट की परतें खुल गई हैं, जिसने पूरी ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
SSC Exams Scam Exposed: How Was This Massive Scam Exposed?
इस पूरे मामले की जड़ें उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से जुड़ी हुई हैं। एसएससी ऑनलाइन परीक्षा में नकल के इस मामले ने अब एक बेहद अहम और निर्णायक मोड़ ले लिया है। इस पूरे घोटाले की भनक सबसे पहले तब लगी जब इसी साल फरवरी के महीने में एमकेपी (MKP) में स्थित ‘महादेव डिजिटल जोन’ नाम की एक परीक्षा लैब में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आईं। इस सूचना के मिलते ही स्पेशल टास्क फोर्स तुरंत हरकत में आई और शुरुआती कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
ईश्वरी प्रसाद की गिरफ्तारी इस केस का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई। एसटीएफ के सामने ईश्वरी ने जो चौंकाने वाले खुलासे किए, उसने पूरे तंत्र में हड़कंप मचा दिया है। उसने बताया कि कैसे परीक्षा केंद्र का सेटअप करने के दौरान ही ऐसी पुख्ता ‘सेटिंग’ कर दी जाती थी जिससे परीक्षा के दिन आसानी से और बिना किसी की नजर में आए नकल की जा सके।
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SSC Exams Scam Exposed: A Network of Over 500 Labs
आरोपी ईश्वरी प्रसाद ने एसटीएफ को जो जानकारी दी, उसके मुताबिक इस गैंग का नेटवर्क बहुत ही विशाल है। उसने एसटीएफ को बताया कि उसने वर्ष 2024 में एक व्यक्ति के कहने पर परीक्षा लैब सेटअप करने का काम शुरू किया था। इस नेटवर्क के मुख्य सरगना का नाम योगेश है, जिसे लोग योगी, इंद्रजीत और ‘जैक’ जैसे कई उपनामों से भी जानते हैं।
योगेश ने ईश्वरी को यह लालच दिया था कि इस पूरे अवैध काम से जो भी फायदा होगा, उसका सीधा 30 फीसदी हिस्सा उसे दिया जाएगा। इसी लालच में आकर ईश्वरी ने सबसे पहले देहरादून में ‘महादेव डिजिटल जोन’ नाम से लैब स्थापित की थी। जब वहां गड़बड़ी पकड़ी गई, तो वह मौका देखकर वहां से फरार हो गया था। अपनी फरारी के दौरान और उससे पहले, इस गैंग ने उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हैदराबाद, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश जैसे कई प्रमुख राज्यों में 500 से भी ज्यादा लैब स्थापित कर डाले थे। हालांकि, पुलिस सूत्रों का कहना है कि इन सभी 500 लैब में नकल की सेटिंग नहीं की गई थी, बल्कि इनमें से 100 से ज्यादा चुनिंदा लैब को ही इस काम के लिए चुना गया था। सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि इस काम में परीक्षा आयोजित कराने वाली कंपनी के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत की भी पूरी आशंका जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि ईश्वरी प्रसाद को इस खास काम के लिए कंपनी के ही कर्मचारियों ने चुना था।
SSC Exams Scam Exposed : The Method of High-Tech Cheating
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर इतनी कड़ी सुरक्षा और चेकिंग के बीच ऑनलाइन परीक्षा में नकल होती कैसे थी? इस गैंग का तरीका बिल्कुल नया और हाई-टेक था। जब कोई नया लैब सेटअप किया जाता था, उसी वक्त यह गिरोह ऐसी तकनीकी सेटिंग कर देता था कि किसी भी आम जांच अधिकारी या कक्ष निरीक्षक की पकड़ में वह आसानी से न आए।
ईश्वरी प्रसाद ने बताया कि कंप्यूटरों में इंटरनेट देने वाले इथरनेट के केबल को लैब के UPS सर्वर रूम के एक गुप्त चेंबर से जोड़ दिया जाता था। इस चालाकी से नकल माफिया के गुर्गे परीक्षा केंद्र के सर्वर और नेटवर्क का पूरा रिमोट एक्सेस अपने हाथों में ले लेते थे। यानी, परीक्षा हॉल के बाहर बैठा व्यक्ति अंदर कंप्यूटर पर चल रहे प्रश्न पत्र को एक्सेस कर सकता था और उसे हल कर सकता था। यह सब इतनी सफाई से किया जाता था कि परीक्षा दे रहे बगल के छात्र को भी शक नहीं होता था। आगामी एक परीक्षा में इसी तरह की गड़बड़ी की पक्की आशंका को देखते हुए पुलिस ने एहतियात के तौर पर एक लैब को हाल ही में बंद भी करा दिया है।
SSC Exams Scam Exposed :The live Feed Remained In Their Hands
इस गिरोह ने सिर्फ कंप्यूटर हैक करने का ही इंतजाम नहीं किया था, बल्कि अपनी चोरी छुपाने के लिए परीक्षा केंद्रों पर लगे CCTV कैमरों का भी पूरा बंदोबस्त कर रखा था। लैब सेटअप के वक्त सिर्फ कंप्यूटर का एक्सेस ही इस गिरोह के लोगों के पास नहीं रहता था, बल्कि वे कैमरों का लाइव फीड भी अपने कंट्रोल रूम से ही मॉनिटर करते थे।
इसे अंजाम देने के लिए सीसीटीवी सर्वर की केबल को भी मुख्य सर्वर रूम के उसी खुफिया चेंबर तक पहुंचाया जाता था, जहां इथरनेट की केबल होती थी। इसका फायदा यह होता था कि ये अपराधी अपनी सुविधानुसार सीसीटीवी कैमरों को चला या बंद कर सकते थे। उदाहरण के तौर पर, अगर उन्हें किसी विशेष सीट के कंप्यूटर पर धांधली करनी होती थी, तो वे उस हिस्से के कैमरे को कुछ देर के लिए बंद कर देते थे या उसकी लाइव फीड में छेड़छाड़ कर देते थे ताकि रिकॉर्डिंग में कुछ भी गलत न दिखे। एसटीएफ की जांच में इस काम के लिए ईश्वरी प्रसाद के अलावा कई अन्य लोगों के नाम भी सामने आए हैं, जिनकी सरगर्मी से तलाश की जा रही है।
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