Allahabad Hc

Allahabad HC: Right to Exam is Part of Right to Life

शिक्षा किसी भी व्यक्ति के जीवन का सबसे मजबूत आधार होती है। शिक्षा के माध्यम से ही व्यक्ति अपने सपनों को साकार करता है और समाज में सम्मानजनक स्थान प्राप्त करता है। लेकिन कई बार तकनीकी त्रुटियों, प्रशासनिक लापरवाही या रिकॉर्ड अपडेट न होने जैसी छोटी-छोटी वजहों से छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ जाता है। ऐसे ही एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि “परीक्षा में बैठने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है।” यह फैसला न केवल एक छात्र के लिए बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र और लाखों छात्रों के अधिकारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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What is the whole story?

यह मामला प्रयागराज से जुड़ा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में बीएससी की छात्रा श्रेया पांडेय ने याचिका दाखिल की थी। श्रेया पांडेय प्रयागराज से संबद्ध एक कॉलेज में बीएससी (बायोलॉजी) प्रथम वर्ष की छात्रा थीं।

छात्रा ने समय पर फीस जमा कर दी थी और शैक्षणिक सत्र 2025–26 के लिए नियमित रूप से कक्षाओं में भी उपस्थित रही। लेकिन जब परीक्षा का समय आया, तो विश्वविद्यालय ने उन्हें प्रवेश पत्र (Admit card) जारी नहीं किया। विश्वविद्यालय की ओर से बताया गया कि छात्रा का रिकॉर्ड विश्वविद्यालय पोर्टल पर अपडेट नहीं हुआ था। 

  • कॉलेज स्तर से रिकॉर्ड अपडेट किया गया | 
  • आवेदन पोर्टल पर छात्रा का डेटा स्पष्ट रूप से मौजूद था | 
  • लेकिन विश्वविद्यालय के मुख्य पोर्टल पर रिकॉर्ड समय पर अपडेट नहीं किया गया| 

इसी तकनीकी कमी के कारण छात्रा को परीक्षा में बैठने से रोक दिया गया, जबकि यह गलती छात्रा की नहीं थी।

Key Arguments Presented in High Court:

छात्रा की ओर से कोर्ट में कहा गया कि:

  • उसने समय पर फीस जमा की | 
  • कक्षाओं में नियमित उपस्थिति दी | 
  • कॉलेज और विश्वविद्यालय की गलती का खामियाजा उसे भुगतना पड़ रहा है | 

वहीं विश्वविद्यालय की ओर से यह तर्क दिया गया कि रिकॉर्ड अपडेट न होने के कारण प्रवेश पत्र जारी नहीं किया जा सका। 

Right to Exam = Right to Life :

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रत्येक व्यक्ति को गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार प्राप्त है। शिक्षा और परीक्षा में बैठने का अधिकार उसी गरिमा का हिस्सा है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि:

  • संबंधित परीक्षा में शामिल होना मौलिक अधिकार है | 
  • प्रशासनिक लापरवाही से इस अधिकार को छीना नहीं जा सकता | 

इस फैसले में कोर्ट ने राहुल पांडे बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले का भी हवाला दिया, जिसमें पहले ही यह माना जा चुका है कि परीक्षा में शामिल होने का अधिकार अनुच्छेद 21 के अंतर्गत संरक्षित है। 

Allahabad HC Order:

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय को निर्देश दिया कि:

  1. छात्रा के लिए विशेष परीक्षा आयोजित की जाए | 
  2. छात्रा को परीक्षा में बैठने का पूरा अवसर दिया जाए | 
  3. भविष्य में ऐसी तकनीकी त्रुटियों से छात्रों को नुकसान न हो, इसके लिए व्यवस्था दुरुस्त की जाए | 

The education system needs reform:

यह मामला एक बार फिर यह साबित करता है कि हमारी शिक्षा व्यवस्था में:

  • डिजिटल सिस्टम की निगरानी जरूरी है | 
  • कॉलेज और विश्वविद्यालय के बीच बेहतर समन्वय होना चाहिए | 
  • छात्रों की समस्याओं का समय पर समाधान जरूरी है | 

छात्रों का भविष्य किसी सिस्टम एरर या फाइल में अटकी जानकारी के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।

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