UP Assistant Professor भर्ती प्रक्रिया में धोखाधड़ी की खबर सामने आने के बाद, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस भर्ती को रद्द करने का निर्णय लिया है। यह कदम राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता और ईमानदारी बनाए रखने के लिए उठाया गया है। इस Blog में हम जानेंगे कि कैसे यह घटना सामने आई, योगी सरकार का इस पर रुख क्या था और इसके परिणाम स्वरूप यूपी के शिक्षा क्षेत्र में क्या बदलाव हो सकते हैं।
उत्तर प्रदेश में सहायक प्रोफेसर भर्ती प्रक्रिया में कुल 910 पदों पर भर्ती की जानी थी। इस भर्ती के लिए परीक्षा 16 और 17 अप्रैल, 2025 को आयोजित की गई थी। लेकिन परीक्षा के बाद से ही कई उम्मीदवारों ने आरोप लगाया कि भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं और धोखाधड़ी हुई थी। सोशल मीडिया और अन्य मंचों पर कई अभ्यर्थियों ने नकल, परीक्षा के दौरान गड़बड़ी, और अन्य अनियमितताओं के बारे में जानकारी दी।

16 और 17 अप्रैल 2025 को 910 पदों के लिए परीक्षा आयोजित की गई।
यह परीक्षा उत्तर प्रदेश में सहायक प्रोफेसर भर्ती के लिए आयोजित की गई थी।20 अप्रैल 2025 को एसटीएफ ने मामले की जांच शुरू की और गिरफ्तारियाँ कीं।
आरोपों के बाद, एसटीएफ ने जांच तेज की और कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया।22 सितंबर 2025 को कृति पांडे ने इस्तीफा दिया।
आयोग की अध्यक्ष कृति पांडे ने भर्ती घोटाले के बाद इस्तीफा दे दिया, जिससे आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठे।7 जनवरी 2026 को परीक्षा को रद्द कर दिया गया।
धोखाधड़ी और अनियमितताओं के चलते, सरकार ने परीक्षा को रद्द कर दिया और भर्ती प्रक्रिया को फिर से प्रारंभ करने का निर्णय लिया।
STF Begins Investigation
इसकी गहराई से जांच के बाद, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोपनीय जांच के आदेश दिए और प्रदेश की एसटीएफ (Special Task Force) को इस मामले की छानबीन का जिम्मा सौंपा। 20 अप्रैल 2025 को, एसटीएफ ने इस मामले में कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया और विभिन्न प्रकार के साक्ष्य जुटाए। यह गिरफ्तारी इस बात को साबित करती है कि परीक्षा में धोखाधड़ी के आरोप केवल अफवाह नहीं थे, बल्कि यह एक गंभीर मामला था।
Kriti Pandey Resigns as Chairman
इस घटनाक्रम के बीच, आयोग की अध्यक्ष कृति पांडे ने इस्तीफा दे दिया। कृति पांडे ने अपने इस्तीफे में जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि आयोग की संचालन प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियां हुई हैं और वे इस मामले में अपनी भूमिका से हटने का निर्णय लेती हैं। उनके इस्तीफे से आयोग की निष्पक्षता और ईमानदारी पर सवाल खड़ा हुआ था, और यह संकेत था कि अधिकारियों के स्तर पर भी आत्ममूल्यांकन की आवश्यकता है। कृति पांडे का इस्तीफा, इस भर्ती घोटाले की गंभीरता को और बढ़ा देता है और सरकार के लिए पारदर्शिता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।
Commission to Conduct Recruitment Process Soon
उत्तर प्रदेश सरकार ने सहायक प्रोफेसर भर्ती घोटाले के बाद स्थिति को संज्ञान में लेते हुए, आयोग को निर्देश दिए हैं कि वह जल्द से जल्द भर्ती प्रक्रिया को पुनः शुरू करे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि भर्ती में पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जाएगी। नए दिशा-निर्देशों के तहत, आयोग द्वारा नई भर्ती प्रक्रिया का आयोजन होगा, जिसमें उम्मीदवारों के चयन में कोई अनियमितता या धोखाधड़ी की संभावना नहीं होगी। इसके साथ ही, इस प्रक्रिया में तकनीकी उपकरणों और निगरानी व्यवस्था का भी खास ध्यान रखा जाएगा, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से बचा जा सके।
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