राजस्थान (Rajasthan), जिसे अपनी सांस्कृतिक और भाषाई विरासत के लिए जाना जाता है, आज अपने संस्कृत विद्यालयों के भविष्य को लेकर संघर्ष कर रहा है। विधानसभा के 16वें सत्र में सामने आयी एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के संस्कृत विद्यालयों में शिक्षकों और कर्मचारियों के 6,142 पद वर्तमान में खाली पड़े हैं, जो कुल स्वीकृत पदों (Sanctioned Posts) 14,190 का लगभग 43 प्रतिशत है।
यह स्थिति न केवल चिंताजनक है, बल्कि यह राजस्थान की संस्कृत शिक्षा व्यवस्था के बुनियादी ढांचे पर भी सवाल उठाती है। पिछले कई वर्षों से इन रिक्तियों को न भरे जाने के कारण राज्य के हजारों विद्यालयों का संचालन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। रिक्त पदों का सबसे बड़ा हिस्सा अध्यापन कार्य से जुड़ा है।
- अध्यापक लेवल-2: सबसे गंभीर स्थिति यहाँ है, जहाँ 3,627 पदों में से 2,598 पद खाली हैं।
- अध्यापक लेवल-1: यहाँ 931 पद रिक्त हैं।
- प्रशासनिक पद: केवल शिक्षक ही नहीं, बल्कि 85% चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी (Fourth Class Employee) और बड़ी संख्या में सहायक स्टाफ के पद भी खाली हैं, जिससे स्कूलों का दैनिक कामकाज ठप होने की कगार पर है।
The Alarming Situation of Vacant Posts in Rajasthan
| Position Category | Sanctioned Posts | Vacant Posts | Vacancy Percentage |
| Teacher Level-2 | 3,627 | 2,598 | ~71.6% |
| Principal (Sr. Upadhyaya Schools) | 496 | 284 | ~57.3% |
| Lecturer (Pradhyapak) | 1,240 | 336 | ~27.1% |
| Teacher Level-1 | Not Specified | 931 | – |
| Total Departmental Staff | 14,190 | 6,142 | ~43.3% |
Non-Teaching & Support Staff Vacancy Status :
| Position Category | Sanctioned Posts | Vacant Posts | Vacancy Percentage |
| Class IV Employees | 616 | 523 | ~84.9% |
| Physical Education Teacher | 213 | 173 | ~81.2% |
| Junior & Senior Assistants | Not Specified | Large Number | High |
Vacancy Status: Non-Teaching and Support Staff
| Position Category | Sanctioned Posts | Vacant Posts | Vacancy Percentage |
| Class IV Staff (Peons/Support) | 616 | 523 | ~84.9% |
| Physical Education Teacher (PET) | 213 | 173 | ~81.2% |
| Junior & Senior Assistants | Not Specified | Significant | N/A |
Government’s Indifference Towards Infrastructure and New Subjects
इस संकट के बीच छात्रों के लिए एक और बुरी खबर यह है कि सरकार फिलहाल जिला स्तर पर संस्कृत विद्यालयों में Hostels खोलने के किसी भी प्रस्ताव पर विचार नहीं कर रही है। वर्तमान में जो कुछ छात्रावास चल रहे हैं, उनका संचालन सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग (Jurisdiction Department) के माध्यम से हो रहा है, जिससे संस्कृत शिक्षा विभाग का सीधा नियंत्रण नहीं रहता।
इसके अलावा, आयुर्वेद जैसे महत्वपूर्ण विषय को दोबारा शुरू करने के प्रस्ताव को भी सरकार ने ठुकरा दिया है। सीमित संसाधन और नई शैक्षणिक पहलों की कमी के कारण ये विद्यालय आधुनिक समय की प्रतिस्पर्धा में पिछड़ते जा रहे हैं।
Expert’s Warn :
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं की गई और बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले वर्षों में संस्कृत शिक्षा के प्रति छात्रों का Disillusionment हो सकता है। किसी भी भाषा को जीवित रखने के लिए उसके शिक्षण संस्थानों का मजबूत होना अनिवार्य है।
रिक्त पदों की यह लंबी सूची न केवल बेरोजगारी के मुद्दे को उठाती है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करती है कि क्या हम अपनी सांस्कृतिक जड़ों को सींचने में असफल हो रहे हैं? सरकार को चाहिए कि वह जल्द से जल्द इन पदों को भरने के लिए ठोस कार्य योजना तैयार करे और संस्कृत विद्यालयों को भी सामान्य विद्यालयों की तरह आधुनिक संसाधनों से लैस करे।
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