Rajasthan

Rajasthan : Health Care Emergency 2500 Vacant Positions, 930 Doctors Handling Files

यह एक गंभीर विषय है जो सीधे आम जनता के स्वास्थ्य और सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल उठता है | राजस्थान (या किसी भी राज्य जहां ऐसी स्थिति हो) के स्वास्थय विभाग के इस विडंबना पर आधारित एक सुचना है | जब हम किसी सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए जाते हैं, तो हमें सबसे पहले जो चीज़ का सामना करना पड़ता है, वह है लंबी कतारें और डॉक्टर साहब का ना आना। यह दृश्य अब किसी भी सरकारी अस्पताल में आम हो चुका है।

Doctors Update

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसका असली कारण क्या है ? हाल ही में सामने आए आंकड़े चौकाने वाले हैं – एक तरफ राज्य में डॉक्टरों के 2500 से अधिक पद खली पड़े हैं | तो दूसरी तरफ 930 डॉक्टर ‘APO’ (Awating Posting Order) होकर मुख्यालय में केवल कागज़ी काम (लिखा-पढ़ी) कर रहे हैं | यह स्थिति किसी विरोधाभास से कम नहीं है | जहाँ गांवों और कस्बों के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों (PHCs) में एक-एक डॉक्टर के लिए मरीज तरस रहे हैं, वहीं प्रशिक्षित चिकित्सा अधिकारी मुख्यालय के वातानुकूलित कमरों में फाइलों के बीच अपना समय बिता रहें है |  

What Is APO And Why Is It A Problem ?

APO (Awaiting Posting Order ) का अर्थ है कि डॉक्टर को वर्तमान कार्यभार से मुक्त कर दिया गया है, लेकिन उसे नही पोस्टिंग नही दी गयी है | इस दौरान :

  1. वे अपनी उपस्थिति मुख्यालय में दर्ज कराते हैं |
  2. जहां  ना किसी मरीज का इलाज किए पूरा वेतन मिलता है |
  3. यह जनता के टैक्स के पैसे की बर्बादी और चिकित्सा संसधानों की भर्ती |

Rajasthan Health Care Emergency : Overview 

Description NumberImpact
Total Post2500+Rural Health Services Are Being Disrupted .
APO Doctor (No. Of Posts)930Deprived Of Specialist Services
Work At Head QuartersPayroll /FilesAdministrative Loss  Of medical Experience.
Burden On The PublicSalaries Worth CroresHuge Financial Expenditure With Treatment.

The Main Reasons For This Discrepancy :

पसंदीदा पोस्टिंग की होड़ : कई बार डॉक्टर दूर दराज के इलाकों में जाने के बजाएं शहर या मुख्यालय के पास रहना पसंद करते है, जिसके चलते वे राजनीतिक या अन्य माध्यमों से खुद को APO करवा लेता हैं ताकि अगली सुविधाजनक पोस्टिंग का इंतज़ार कर सकें |

प्रशासनिक रवैया : स्वास्थय विभाग में स्थानांतरण और पद स्थान की कमी होने के कारण सैकड़ों डॉक्टर महिने तक मुख्यालय में अटके रह जाते है |

विभागीय राजनीति : अधिकारीयों और डॉक्टरों के बीच तालमेल की कमी भी इसका एक बड़ा कारण है |

Direct Impact On Rural Areas :

जहाँ ये 930 डॉक्टर तैनात होने चाहिए थे, वहां आज स्थिति ये है :

रेफरेल का बोझ : छोटे केन्द्रों पर डॉक्टर न होने के कारण मामूली बिमारियों के मरीजों को भी जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज में रेफेर कर दिया जाता हैं, जिसमे बड़े अस्पताल में भीड़ अनियंत्रित हो जाती है |

समय पर इलाज का आभाव : सड़क हादसों  या इमरजेंसी की स्थिति में डॉक्टर ने होने के कारण कीमती जान चली जाती है |

निजी अस्पतालों की चांदी : सरकारी व्यवस्था में डॉक्टर न मिलने पर गरीब  मरीज कर्ज लेकर निजी अस्पतालों में जाने को मजबूर होता है |

Conclusion :

डॉक्टर का काम स्टेथोस्कोप पकड़ना और मरीज की नब्ज टटोलना  है, न कि सचिवालय की फाइलों पर हताक्षर करना | यदि 930 विशेषज्ञ डॉक्टर मुख्यालय में बैठकर लिखा पढ़ी करेंगे, तो प्रदेश की स्वास्थय व्यवस्था का ख़राब होना तैय है | सरकार को चाहिए कि वह राजनीती के उपर उठकर स्वास्थय सेवाओं को प्राथमिक दे और रिक्त पदों को भरकर इन खाली बैठें डॉक्टरों को मैदान में उतारे |

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