Closure Of 84,000 Government Schools

Closure of 84,000 Government Schools in India, Know Full Details!!

साल 2018-19 से लेकर अब तक भारत के शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी एक चिंताजनक खबर सामने आई है। ‘मिंट’ (Mint) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पूरे देश में लगभग 84,000 सरकारी और सरकारी सहायता पाने वाले (government-aided) स्कूल बंद हो चुके हैं। इसके साथ ही, इन स्कूलों में एडमिशन (दाखिला) लेने वाले बच्चों की संख्या में भी करीब 1.5 करोड़ की बड़ी कमी आई है।

स्कूलों के बंद होने की वजह सिर्फ बच्चों की कम संख्या ही नहीं है, बल्कि बिजली, शौचालय, कंप्यूटर और इंटरनेट जैसी बुनियादी सुविधाओं का न होना भी एक बड़ा कारण है। इसके अलावा, राज्य सरकारों द्वारा पढ़ाई के बजट में कटौती करने और चुनाव के समय लोगों को सीधे कैश (नकद पैसे) बांटने की योजनाओं के कारण शिक्षा पर होने वाले कुल खर्च पर बुरा असर पड़ा है।

Closure of 84,000 Government Schools: Overview

Metric / Parameter Key Details & Data
Time Period Covered 2018-19 to 2025-26
Closed Government & Aided Schools 84,000 schools nationwide
Decline in Student Enrollment 1.5 Crore students
Average State Education Spending (RBI Data) 13% – 14% of total state budget
UNESCO Spending Benchmark 15% – 20% of total state budget
States Meeting UNESCO Spending Standard
  • Bihar (18.78%)
  •  Uttarakhand (17.35%)
  • Rajasthan (16.9%)
  • Chhattisgarh (16.18%)
Top States by Composite Score (2025-26)
  • Delhi (99.25%)
  • Punjab (98.21%)
  • Gujarat (98.03%)
Worst States in Basic Infrastructure
  • Rajasthan
  • Karnataka
  • Madhya Pradesh
  • Jammu & Kashmir
  • West Bengal

Steep Decline in School Enrollment

देश के कई राज्यों में सरकारी एवं सहायता प्राप्त स्कूलों में छात्रों के दाखिले में भारी कमी देखी गई है। आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड ऐसे प्रमुख राज्य हैं जहाँ नामांकन में सबसे अधिक गिरावट आई है। रिपोर्ट के अनुसार, 3 से 17 साल के बच्चों की आबादी में हुई कमी की तुलना में स्कूलों में दाखिला लेने की दर बहुत अधिक तेजी से गिरी है।

Infrastructure Deficit and Composite Score

सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं जैसे बिजली, शौचालय (toilets), कंप्यूटर और इंटरनेट की स्थिति काफी खराब है। यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल सहित कुल 10 राज्यों में यह समस्या सबसे अधिक चिंताजनक है।

अगर मूलभूत सुविधाओं के मामले में देखा जाए तो राजस्थान, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और पश्चिम बंगाल का प्रदर्शन सबसे खराब रहा है। वहीं दूसरी ओर, दिल्ली, पंजाब, गुजरात, केरल और तमिलनाडु ने इन सुविधाओं के मामले में सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया है। वर्ष 2025-26 के लिए सरकारी स्कूलों की स्थिति पर जारी कम्पोजिट स्कोर (Composite Score out of 100):

State Composite Score (Out of 100)
Delhi 99.25%
Punjab 98.21%
Gujarat 98.03%
Madhya Pradesh 76.83%
West Bengal 76.81%

Impact of Election Cash Transfers on Education Budget

आरबीआई (RBI) के आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ सालों से भारत के राज्य अपनी कुल कमाई/बजट का केवल 13% से 14% हिस्सा ही पढ़ाई-लिखाई (शिक्षा) पर खर्च कर रहे हैं। यह यूनेस्को (UNESCO) के तय किए गए नियम 15% से 20% से काफी कम है। साल 2010 -11 से 2014-15 के बीच राज्य अपनी पढ़ाई पर 16% या उससे ज्यादा खर्च करते थे, लेकिन अब इसमें गिरावट आ गई है।

इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह चुनाव के समय बांटी जाने वाली नकद योजनाएं (cash transfers) हैं। लगभग 12 से 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने चुनाव जीतने के लिए लोगों को सीधे पैसे बांटने की घोषणाएं की हैं। इस वजह से राज्यों के पास शिक्षा के बजट के लिए पैसे कम पड़ रहे हैं।

State-Wise Expenditure on Education

2018-19 से 2025-26 के दौरान राज्यों द्वारा अपने कुल बजट से शिक्षा पर किए गए औसतन खर्च का प्रतिशत इस प्रकार है:

State / UT Education Expenditure (% of Total Budget) Alignment with UNESCO Standard (15% – 20%)
Bihar 18.78% Meets UNESCO Standard
Uttarakhand 17.35%
Rajasthan 16.9%
Chhattisgarh 16.18%
Jammu & Kashmir 14.95% Below UNESCO Standard
West Bengal 14.86%
Madhya Pradesh 13.76%
Uttar Pradesh 13.41%
Jharkhand 13.03%
Karnataka 10.96%

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