06 July Current Affairs Rojgar With Ankit 2026

Current Affairs Today (06 July 2026)

 

  1. ICMR-NIRWoH वैज्ञानिकों ने किसके साथ मिलकर स्वदेशी “प्लेसेंटा-ऑन-चिप” प्लेटफ़ॉर्म विकसित किया है? IIT बॉम्बे
  2. व्यावसायिक स्तर पर माचा चाय का उत्पादन करने वाला भारत का पहला राज्य कौन-सा बना है? असम
  3. हाल ही में UNESCO एशिया-प्रशांत सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण पुरस्कार 2025 से किसे सम्मानित किया गया है? ज्येष्ठ वर्ण महाविहार
  4. वैभव सूर्यवंशी किसका रिकॉर्ड तोड़कर भारत के लिए अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खेलने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने हैं? सचिन तेंदुलकर
  5. ब्रिक्स मादक पदार्थ निरोधक एजेंसियों के प्रमुखों की बैठक 2026 कहाँ आयोजित की जाएगी? गुवाहाटी
  6. अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस 2026 कब मनाया गया है? 4 जुलाई
  7. किस राज्य सरकार ने स्कूलों के पास एनर्जी ड्रिंक्स पर बैन लगाया है? महाराष्ट्र
  8. हाल ही में दिवंगत पंडवानी गायिका तीजन बाई का संबंध किस राज्य से था? छत्तीसगढ़
  9. किस देश के प्रधानमंत्री अलेक्ज़ेंड्रू मुंटेनु ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है? मोल्दोवा
  10. हाल ही में विंबलडन पुरुष एकल में 105 मैच जीतकर किस खिलाड़ी ने रोजर फेडरर के रिकॉर्ड की बराबरी की है? नोवाक जोकोविच

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    ICMR-NIRWoH वैज्ञानिकों ने IIT बॉम्बे के साथ मिलकर स्वदेशी "प्लेसेंटा-ऑन-चिप"प्लेटफ़ॉर्म विकसित किया है|

    भारतीय वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में मानव प्लेसेंटा (Placenta) के प्रमुख कार्यों की नकल करने वाला स्वदेशी "प्लेसेंटा-ऑन-चिप (Placenta-on-Chip)" प्लेटफ़ॉर्म विकसित किया है। इस तकनीक का विकास भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (Indian Council of Medical Research - ICMR) के राष्ट्रीय प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान (National Institute for Research in Reproductive and Child Health - ICMR-NIRWoH) तथा आईआईटी बॉम्बे (IIT Bombay) के वैज्ञानिकों ने संयुक्त रूप से किया है। उद्देश्य: मातृ एवं भ्रूण स्वास्थ्य (Maternal and Fetal Health) पर अनुसंधान को बढ़ावा देना तथा पशु परीक्षणों (Animal Testing) पर निर्भरता को कम करना| यह प्लेटफ़ॉर्म प्लेसेंटा के कई महत्वपूर्ण कार्यों को सफलतापूर्वक दोहराता है, जिनमें हार्मोन उत्पादन (Hormone Production), पोषक तत्वों का स्थानांतरण (Nutrient Transfer), अपशिष्ट पदार्थों का निष्कासन (Waste Exchange) तथा चयनात्मक अवरोधक कार्य (Selective Barrier Function) शामिल हैं। यह गर्भावस्था से जुड़े हार्मोन का उत्पादन कर सकता है, माँ की ओर से भ्रूण तक ग्लूकोज़ (Glucose) पहुँचाता है, यूरिया (Urea) जैसे अपशिष्ट पदार्थों को हटाता है तथा गर्भकालीन मधुमेह (Gestational Diabetes) जैसी उच्च रक्त शर्करा (Hyperglycemic) स्थितियों पर भी प्रतिक्रिया देता है। यह तकनीक प्लेसेंटा की जैविक प्रक्रियाओं, गर्भावस्था संबंधी जटिलताओं तथा दवाओं के प्लेसेंटा अवरोध (Placental Barrier) को पार करने के तरीके के अध्ययन में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान करेगी।

  • 2

    भारत के पहले ग्रीनफील्ड एकीकृत रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन राजस्थान में किया गया है|

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान के पचपदरा में भारत के पहले ग्रीनफील्ड एकीकृत रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स (India’s First Greenfield Integrated Refinery-cum-Petrochemical Complex) का उद्घाटन किया। ₹79,450 करोड़ की लागत से विकसित यह परियोजना हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (Hindustan Petroleum Corporation Limited - HPCL) और राजस्थान सरकार (Government of Rajasthan) का संयुक्त उपक्रम (Joint Venture) है। इस कॉम्प्लेक्स की रिफाइनिंग क्षमता (Refining Capacity) 9 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष तथा पेट्रोकेमिकल उत्पादन क्षमता (Petrochemical Capacity) 2.4 MMTPA है।

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    व्यावसायिक स्तर पर माचा चाय का उत्पादन करने वाला भारत का पहला राज्य असम बना है|

    असम व्यावसायिक स्तर पर माचा चाय का उत्पादन (commercially produce Matcha tea) करने वाला भारत का पहला राज्य बन गया है। तिनसुकिया जिले के छोटा तिंगराई टी एस्टेट (Chota Tingrai Tea Estate) ने देश की पहली व्यावसायिक माचा चाय का उत्पादन शुरू किया है। इस एस्टेट द्वारा तैयार 5 किलोग्राम की पहली खेप को गुवाहाटी टी ऑक्शन सेंटर (Guwahati Tea Auction Centre) में जे. थॉमस एंड कंपनी प्राइवेट लिमिटेड (J. Thomas & Co. Pvt. Ltd.) के माध्यम से नीलाम किया गया, जहाँ इसे ₹3,000 प्रति किलोग्राम का मूल्य प्राप्त हुआ। यह उपलब्धि जापानी विशेषज्ञों के साथ लगभग एक दशक लंबे सहयोग का परिणाम है। असम पहले से ही विश्व का सबसे बड़ा चाय उत्पादक क्षेत्र माना जाता है। माचा चाय पारंपरिक रूप से जापान (Japan) से जुड़ी हुई है। यह विशेष रूप से उगाई गई हरी चाय की पत्तियों (Green Tea Leaves) से तैयार किया गया बारीक पिसा हुआ पाउडर होता है। सामान्य ग्रीन टी के विपरीत, जिसमें पत्तियों को उबालकर बाद में अलग कर दिया जाता है, माचा में पूरी पिसी हुई पत्ती का सेवन किया जाता है। इसी कारण यह एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidants), क्लोरोफिल (Chlorophyll), विटामिन (Vitamins) तथा अमीनो अम्ल (Amino Acids) से भरपूर माना जाता है और स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी होता है।

  • 4

    हाल ही में UNESCO एशिया-प्रशांत सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण पुरस्कार 2025 से ज्येष्ठ वर्ण महाविहार को सम्मानित किया गया है|

    नेपाल (Nepal) के ललितपुर स्थित ज्येष्ठ वर्ण महाविहार (Jeshtha Varna Mahavihara) को 2025 यूनेस्को एशिया-प्रशांत सांस्कृतिक विरासत संरक्षण पुरस्कार (2025 UNESCO Asia-Pacific Award for Cultural Heritage Conservation) से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान महाविहार की उपयोगकर्ता समिति को नेपाल में यूनेस्को के प्रतिनिधि जैको डु टोइट (Jaco Du Toit) द्वारा प्रदान किया गया। पुरस्कार समारोह में स्थानीय समुदाय के सदस्य, विरासत संरक्षण विशेषज्ञ, सरकारी अधिकारी तथा भारतीय राष्ट्रीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत ट्रस्ट (Indian National Trust for Art and Cultural Heritage - INTACH) के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इस संरक्षण परियोजना को भारत सरकार द्वारा नेपाल के सांस्कृतिक विरासत क्षेत्र में भूकंप के बाद पुनर्निर्माण पहल (Post-earthquake Reconstruction Initiative) के अंतर्गत 13.78 करोड़ नेपाली रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई थी।

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    बिहार में स्थित बरगद वृक्ष को वैज्ञानिक रूप से विश्व का सबसे पुराना सटीक रूप से दिनांकित बरगद का वृक्ष घोषित किया गया है|

    बिहार के मुंगेर जिले स्थित बिहार बरगद (फ़िकस बेंघालेंसिस Ficus benghalensis) को वैज्ञानिक रूप से विश्व का सबसे पुराना सटीक रूप से दिनांकित बरगद का वृक्ष (World’s Oldest Accurately Dated Banyan Tree) घोषित किया गया है।
    इस वृक्ष की अनुमानित आयु लगभग 700 वर्ष आंकी गई है। यह उपलब्धि उष्णकटिबंधीय (Tropical) विरासत वृक्षों की वैज्ञानिक आयु निर्धारण (Scientific Dating) के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सफलता मानी जा रही है और इससे विश्वभर में ऐसे प्राचीन वृक्षों के संरक्षण (Conservation) को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
    वृक्ष की आयु का निर्धारण उच्च-सटीकता रेडियोकार्बन डेटिंग (High-Precision Radiocarbon Dating) तकनीक से किया गया। यह विधि विशेष रूप से उष्णकटिबंधीय चौड़ी पत्ती वाले वृक्षों (Tropical Broadleaf Trees) की वास्तविक आयु ज्ञात करने के लिए विकसित की गई है, जिनकी आयु का अनुमान पहले मुख्यतः ऐतिहासिक अभिलेखों या लोककथाओं के आधार पर लगाया जाता था। यह शोध बिरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (Birbal Sahni Institute of Palaeosciences - BSIP), लखनऊ की वैज्ञानिक डॉ. त्रिना बोस के नेतृत्व में किया गया।

  • 6

    ब्रिक्स मादक पदार्थ निरोधक एजेंसियों के प्रमुखों की बैठक 2026 गुवाहाटी में आयोजित की जाएगी|

    भारत 6 और 7 जुलाई 2026 को असम के गुवाहाटी में ब्रिक्स देशों के मादक पदार्थ निरोधक एजेंसियों के प्रमुखों की बैठक (BRICS Heads of Anti-Drug Agencies Meeting) की मेजबानी करेगा। इस बैठक का आयोजन गृह मंत्रालय के अंतर्गत नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (Narcotics Control Bureau - NCB) द्वारा किया जा रहा है। इसमें ब्रिक्स सदस्य देशों की मादक पदार्थ निरोधक एजेंसियों के प्रमुख और वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे।
    बैठक का उद्देश्य: संचालन समन्वय (Operational Coordination) को मजबूत करना, खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान (Intelligence Sharing) को बढ़ावा देना, क्षमता निर्माण (Capacity Building) को प्रोत्साहित करना तथा उभरते नशीले पदार्थों से जुड़े खतरों (Emerging Drug-related Threats) के विरुद्ध सामूहिक रणनीति विकसित करना | बैठक में विशेष रूप से तीन प्रमुख प्राथमिकताओं पर चर्चा होगी— सिंथेटिक ड्रग्स (Synthetic Drugs) तथा प्रीकर्सर रसायनों (Precursor Chemicals) के दुरुपयोग पर रोक, सदस्य देशों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने और संयुक्त अभियानों के समन्वय को सुदृढ़ करना तथा संस्थागत सहयोग (Institutional Cooperation) और क्षमता निर्माण (Capacity Building) को बढ़ावा देना।

  • 7

    अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस 2026 4 जुलाई को मनाया गया है|

    अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस (International Day of Cooperatives – CoopsDay) प्रत्येक वर्ष जुलाई के प्रथम शनिवार को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह दिवस 4 जुलाई को मनाया गया| वर्ष 2026 की थीम: “शांतिपूर्ण विश्व के लिए सहकारिताएँ (Cooperatives for a Peaceful World)”| उद्देश्य: शांति, सामाजिक समावेशन (Social Inclusion) और सतत विकास (Sustainable Development) को बढ़ावा देने में सहकारी संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका के प्रति जागरूकता फैलाना | अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस का आयोजन सहकारी आंदोलन द्वारा 1923 से किया जा रहा है। 1995 में संयुक्त राष्ट्र (United Nations - UN) ने अंतरराष्ट्रीय सहकारी गठबंधन (International Cooperative Alliance - ICA) की शताब्दी के अवसर पर इसे आधिकारिक मान्यता प्रदान की।

  • 8

    महाराष्ट्र ने स्कूलों के पास एनर्जी ड्रिंक्स पर बैन लगाया है|

    महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के सभी स्कूलों के 500 मीटर के दायरे में उच्च ऊर्जा पेय (High Energy Drinks), जैसे स्टिंग (Sting), की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध (Comprehensive Ban) लगाने की घोषणा की है। उद्देश्य: बच्चों और युवाओं में उच्च कैफीन युक्त पेयों (High-Caffeine Beverages) के बढ़ते सेवन को नियंत्रित करना तथा उनके स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना| इस संबंध में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (Food and Drug Administration - FDA) मंत्री नरहरी ज़िरवाल ने महाराष्ट्र विधानसभा (Maharashtra Legislative Assembly) में निर्देश जारी किया। सरकार का मानना है कि स्कूलों के आसपास ऐसे पेयों की आसान उपलब्धता विद्यार्थियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। इसलिए यह कदम सुरक्षित एवं स्वस्थ शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया है।

  • 9

    केइको फुजीमोरी ने पेरू का राष्ट्रपति चुनाव जीता है|

    पेरू (Peru) में हुए राष्ट्रपति पद के रनऑफ चुनाव (Presidential Runoff Election) में दक्षिणपंथी नेता केइको फुजीमोरी (Keiko Fujimori) ने वामपंथी उम्मीदवार रोबर्टो सांचेज़ (Roberto Sanchez) को हराकर जीत हासिल की है। केइको फुजीमोरी, पूर्व राष्ट्रपति अल्बर्टो फुजीमोरी (Alberto Fujimori) की पुत्री हैं और वे चौथी बार राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ रही थीं। इस जीत के साथ वह इस महीने के अंत में पदभार ग्रहण करने पर पिछले 10 वर्षों में पेरू की नौवीं राष्ट्रपति बन जाएंगी। साथ ही, वे पेरू की पहली निर्वाचित महिला राष्ट्रपति (First Elected Female President) भी होंगी। इससे पहले दीना बोलुआर्ते (Dina Boluarte) ने पेड्रो कास्टिलो (Pedro Castillo) के पद से हटाए जाने के बाद संवैधानिक उत्तराधिकार (Constitutional Succession) के तहत राष्ट्रपति पद संभाला था, लेकिन वे प्रत्यक्ष चुनाव के माध्यम से निर्वाचित नहीं हुई थीं।

  • 10

    हाल ही में दिवंगत पंडवानी गायिका तीजन बाई का संबंध छत्तीसगढ़ से था|

    छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध पंडवानी (Pandavani) गायिका एवं पद्म विभूषण (Padma Vibhushan) सम्मान से अलंकृत तीजन बाई का 70 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने महाभारत पर आधारित पारंपरिक लोककथा गायन शैली पंडवानी को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारतीय लोककला के संरक्षण और संवर्धन में उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें पद्म श्री (Padma Shri), पद्म भूषण (Padma Bhushan), पद्म विभूषण (Padma Vibhushan) तथा संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (Sangeet Natak Akademi Award) सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया गया। उस समय जब महिलाएँ परंपरागत रूप से बैठकर प्रस्तुत की जाने वाली वेदमती शैली (Vedamati Style) में पंडवानी का गायन करती थीं, तीजन बाई ने इस परंपरा को तोड़ते हुए पुरुष कलाकारों के वर्चस्व वाली खड़े होकर प्रस्तुत की जाने वाली “कपालिक शैली (Kapalika Style)” को अपनाने वाली पहली महिला कलाकार बनकर इतिहास रचा। वर्ष 2007 में उन्हें नृत्य शिरोमणि (Nritya Shiromani) की उपाधि प्रदान की गई।
    इसके बाद 2017 में खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय (Khairagarh Music University) ने उन्हें मानद डी.लिट. (Honorary D.Litt.) की उपाधि से सम्मानित किया। अपने जीवनकाल में उन्हें कुल चार मानद डी.लिट. उपाधियाँ प्राप्त हुईं तथा कला के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए जापान (Japan) का प्रतिष्ठित फुकुओका पुरस्कार (Fukuoka Prize) भी प्रदान किया गया।

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