Rajasthan New Education Policy

The New Education Policy’s Impact on Rajasthan

राजस्थान में उच्च शिक्षा को लेकर एक बड़ा फैसला सामने आया है। राज्य सरकार ने कॉलेजों में लगभग 5,000 अस्थायी (Temporary/Contractual) पदों पर भर्ती करने की तैयारी शुरू कर दी है। यह कदम नई शिक्षा नीति (New Education Policy – NEP) के तहत कॉलेजों में स्टाफ की कमी को पूरा करने के लिए उठाया जा रहा है।

New Education Policy : Background of the Decision

राजस्थान के सरकारी कॉलेजों में लंबे समय से सहायक आचार्य (Assistant Professor) और अन्य शैक्षणिक व गैर-शैक्षणिक पद खाली पड़े हैं। नियमित भर्ती प्रक्रिया (Regular Recruitment) काफी समय से लंबित है। नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद कॉलेजों में विषयों की संख्या, स्टूडेंट्स का enrollment और academic activities बढ़ी हैं। लेकिन स्थायी शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसी स्थिति को संभालने के लिए सरकार ने अस्थायी पदों पर भर्ती का रास्ता चुना है। 

Total Posts and Structure:

सरकार ने करीब 5,000 पदों पर भर्ती का प्रस्ताव तैयार किया है। इनमें से लगभग:

  • 3,540 शैक्षणिक पद (Academic Posts)
  • 1,184 गैर-शैक्षणिक पद (Non-Academic Posts)

इन पदों को Contract Basis पर भरा जाएगा। 

Salary Details (Post-wise): 

Post Name Monthly Salary (₹)
Teaching Assistant 28,850
Office Clerk 10,400
Data Entry Assistant 13,150
Laboratory Assistant 13,150
Support Staff 8,850

Teaching Assistant Model Explained  

सरकार ने नियमित Assistant Professor की जगह Teaching Assistant का मॉडल अपनाया है।

What is Teaching Assistant?

Teaching Assistant (TA) ऐसे शिक्षक होंगे जिन्हें Contract पर रखा जाएगा और उन्हें लगभग ₹28,850 मासिक वेतन दिया जाएगा। सरकार का तर्क है कि इससे कॉलेजों में पढ़ाई बाधित नहीं होगी और कम समय में स्टाफ उपलब्ध हो जाएगा।

लेकिन आलोचकों का कहना है कि:

  • यह UGC नियमों से बचने का तरीका है।
  • कम वेतन में qualified teachers को रखना शिक्षा की गुणवत्ता पर असर डाल सकता है।
  • Contract system से job security नहीं मिलेगी।

Why Not Regular Recruitment? 

कई लोगों का सवाल है कि जब कॉलेजों में इतने पद खाली हैं, तो Regular Recruitment क्यों नहीं की जा रही?

Possible Reasons:

  1. Financial Burden – स्थायी भर्ती से सरकार पर long-term financial load बढ़ेगा।
  2. Budget Approval – वित्त विभाग से सीमित मंजूरी मिली है।
  3. Time Factor – नियमित भर्ती प्रक्रिया लंबी और जटिल होती है।

सरकार का मानना है कि यह एक temporary arrangement है जब तक नियमित भर्ती पूरी नहीं हो जाती।

Impact on Education System: 

Positive Points

  • कॉलेजों में तुरंत शिक्षक उपलब्ध होंगे।
  • स्टूडेंट्स की पढ़ाई बाधित नहीं होगी।
  • New Education Policy को लागू करने में मदद मिलेगी।

Negative Points

  • कम वेतन से quality teachers attract नहीं होंगे।
  • Contract based job से स्थिरता (Stability) नहीं रहेगी।
  • लंबे समय तक यह व्यवस्था बनी रही तो शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। 

Opposition and Concerns : 

शिक्षक संगठनों और शिक्षा विशेषज्ञों ने इस फैसले का विरोध किया है। उनका कहना है कि:

  • यह “Stop-gap arrangement” है, स्थायी समाधान नहीं।
  • UGC norms के अनुसार नियमित भर्ती जरूरी है।
  • Contract system से शिक्षकों का future uncertain रहेगा।

कुछ संगठनों ने कहा है कि अगर नियमित भर्ती जल्द शुरू नहीं की गई तो आंदोलन (Protest) किया जाएगा।

Financial Angle : 

सरकार ने खर्च कम रखने के लिए Contract model चुना है। अगर 3,540 Teaching Assistants को ₹28,850 दिए जाएं तो:

  • Monthly Approx Expense: लगभग ₹10-11 करोड़
  • Annual Approx Expense: ₹120 करोड़ से ज्यादा

लेकिन अगर इन्हीं पदों पर Regular Assistant Professor रखे जाएं तो खर्च लगभग दोगुना हो सकता है।

इसलिए सरकार इसे एक Cost-effective model बता रही है।

Is This in Line with NEP 2020?

New Education Policy 2020 का उद्देश्य है:

  • Quality Education
  • Multidisciplinary Approach
  • Skilled Teachers

लेकिन सवाल यह है कि क्या Contract Teachers से long-term academic excellence मिल पाएगी? NEP का फोकस Quality पर है, जबकि Contract system अधिकतर Quantity पर आधारित लगता है। 

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